Friday, April 3, 2009

आपको भी जल्दी ही, नया मोबाइल खरीदना ही होगा...



क्या आपको पता है कि आपके मोबाइल फ़ोन के दिन चुकने ही वाले हैं. अब जो फोन आयेंगे वे या तो टच-स्क्रीन वाले होंगे या उनके की-बोर्ड, टाइप राईटर के की-बोर्ड जैसे होंगे जिन्हें QWERTY की-बोर्ड कहा जाता है. यानि, आजकल बहुप्रचलित एबीसी के क्रम में टाइप करने वाले मोबाइल फोन का ज़माना गया ही समझो. ये जानने के लिए कि इन्हें QWERTY की-बोर्ड क्यों कहा जाता है, आप अपने कंप्यूटर के की-बोर्ड को देखिये. गिनती टाइप करने वाले बटनों के ठीक नीचे वाली लाइन में जो बटन हैं वे इसी क्रम में हैं.

अमरीका के लास वेगास में चल रहे व्यापर मेले में इस बार एक भी ऐसा नया मोबाइल फोन पेश नहीं किया गया जो प्रचलित मॉडल जैसा हो. भारत में भले ही ज्यादातर लोगों का अंग्रेजी की-बोर्ड से कुछ भी लेना देना न हो, ये माना जाता है की लोग QWERTY की-बोर्ड को अधिल सुगम मानते हैं. ये बात भी दीगर है कि इन मोबाइल फोन का की-बोर्ड इतना छोटा होता है कि आप आम की--बोर्ड की तरह तो इसका प्रयोग यूं भी नहीं कर सकते.

QWERTY की-बोर्ड और टच-स्क्रीन पर अधिक ध्यान देने का कारण कम्पनियाँ ये बताती हैं कि मोबाइल पर टेक्स्ट मेसेज और इन्टरनेट का बढ़ता प्रयोग इसकी मुख्य वजह हैं. मोबाइल कम्पनियों ने पाया कि लोगों ने मोबाइल फोन का प्रयोग टेक्स्ट मेसेज के लिए, बात करने की अपेक्षा कई गुना ज्यादा किया.

इसी मेले में, सैमसंग कम्पनी दुनिया का पहला OLED (organic light-emitting diodes) फोन भी लेकर आ रही है. अभी तक आपने LED या प्लाज़्मा स्क्रीन वाले फोन ही देखे होंगे. OLED, डाईओड का लेप यदि आप किसी भी सतह पर कर दें तो उसे स्क्रीन की तरह प्रयोग किया जा सकता, ज़रुरत केवल उन डाईओड तक बिजली से सिग्नल पहुंचाने की होती है, OLED लगभग डेढ़ दशक पुरानी खोज है किन्तु इसका व्यावसायिक प्रयोग बड़े पैमाने पर होना अभी शेष है. ये डाईओड क्योंकि अपने ही रौशनी उत्पन्न करते हैं इसलिए, ऐसे मोबाइल फोन की बैट्री लाइफ बढ़ जाती है. OLED की तस्वीर भी कहीं बेहतर गुणवत्ता वाली होती है.

5 comments:

  1. यह जल्‍दी कितनी जल्‍दी होगी।

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  2. जब नोकिया जैसी कंपनियों अपना सारा पुराना माल, भारत जैसे देशों को टिका देंगी... तो उसके बाद उन्हें नया माल भी यहाँ मजबूरी में उतरना ही होगा. क्योंकि वर्तमान में, हमारे यहाँ प्रचलित मोबाइल फ़ोन मोडल्स का उत्पादन नहीं किया जा रहा है.

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  3. बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत को बहुत समय से कूड़ाघर बना रखा है। इस प्रवृत्ति से निजात पाने के लिये हमें ही कुछ करना होगा। कोई भारतीय किसी बढ़िया मोबाइल का आविष्कार क्यों नहीं करता?

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  4. भई मेरे मोबाईल में तो qwerty की पैड, टच स्क्रीन तो है ही साथ ही साथ ऑप्टिकल फ़िंगर माउस भी है।

    कम से कम आने वाले कुछ समय तो मुझे नया हैंडसेट नहीं खरीदना पडेगा।

    देखिये, ये है मेरा खिलौना

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  5. क्या आप इस तरह के मेसेज अपने मोबाइल पर निशुल्क प्राप्त करना चाहते
    सोचो ! अगर ईश्वर प्रति दिन का हमसे 1000 रूपया लेता तो क्या हम एक सैकण्ड भी व्यर्थ करते।

    • यदि बड़ा आदमी बनना हैं तो पहले छोटा आदमी बनो।
    • सकारात्मक सोचने की कला-सोचे वही जो बोला जा सके और बोले वही जिसके नीचे हस्ताक्षर किये जा सके।
    • जो लोग सुबह उगता हुआ सूरज देखते हैं, वे उगते हुए भाग्य के मालिक बनते हैं।
    • हमें स्वयं को केवल एक मिनट के लिये बूढ़ा बनाना चाहिये। कब ? जब सामने मौत आने वाली हो।
    • असफलता की ट्रेन आमतौर पर अनिर्णय की पटरी पर दौड़ती हैं।
    • 99 फीसदी मामलों में वही लोग असफल होते हैं, जिनमें बहाने बनाने की आदत होती हैं।
    • इन्सान को सद् इन्सान केवल विचारों के माध्यम से बनाया जा सकता है।
    • मालिक बारह घण्टे काम करता हैं, नौकर आठ घण्टे काम करता हैं, चोर चार घण्टे काम करता हैं। हम सब अपने आप से पूछे कि हम तीनों में से क्या है।
    • भगवान की दुकान प्रात: चार बजे से छ: बजे तक ही खुलती है।
    • परिवर्तन से डरोगे तो तरक्की कैसे करोगे ?
    • सबसे अधिक खराब दिन वे हैं जब हम एक बार भी हँसी के ठहाके नहीं लगाते हैं।
    • सद्विचार सत्य को लक्ष्य करके छोड़ा हुआ तीर है।
    • आप ढूँढे तो परेशानी का आधा कारण अपने में ही मिल जाता है।
    • यदि जीने की कला हाथ लग जाये तो जीवन बांस का टुकड़ा नहीं, आनन्द देने वाली बांसुरी बन जाती है।
    • यदि हम किसी दूसरे जैसा बनने की कोशिश करते हैं, तो दूसरे स्थान पर ही रहते हैं। अगर हमें आदर्श स्थिति पर पहुंचना हैं, तो खुद अपना रास्ता बनाना होगा।
    • कई लोग जिंदगी में सही निशाना तो साध लेते हैं, पर ट्रिगर नहीं दबा पाते हैं, जिंदगी में निर्णय लेना बेहद जरूरी हैं।
    • प्रेम दूरबीन से देखता हैं और ईश्र्या माइक्रोस्कोप से।
    • श्रेष्ठ प्रबन्धन संघर्ष और सफलता के बीच के अन्तर को समाप्त करता हैं।
    • बीते समय में हमने भविष्य की चिन्ता की, आज भी हम भविष्य के लिये सोच रहे हैं और शायद कल भी यही करेंगे। फिर हम वर्तमान का आनन्द कब लेंगे ?
    • किसी में कमी तलाश करने वालों की मिसाल उस मक्खी की तरह हैं जो पूरा सुन्दर जिस्म छोड़कर सिर्फ जख्म पर ही बैठती हैं।
    • जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते हैं, वे तो बस हर काम को अलग अन्दाज से करते हैं।
    • जिन्दगी में कभी किसी के ऊपर निर्भर नहीं रहना, चाहे वह आपकी परछाया ही क्यो न हो, अंधेरे में वह भी आपका साथ छोड़ देगी।
    • एक ध्येय वाक्य-``यह भी बीत जायेगा।´´ ये चार शब्द चार वेदों का काम कर सकते हैं।

    यदि हाँ तो-

    अपने मोबाइल में मेसेज टाइप करे - JOIN लिखे, इसके बाद एक स्पेस दे, फिर MOTIVATIONS लिखे। इसे 09870807070 पर भेज दें। Successfully subscribe होने के बाद प्रतिदिन आपको अनमोल सद्विचार अपने मोबाइल पर प्राप्त होते रहेंगे। यह सेवा पूर्णतया नि:शुल्क हैं। हमारी आप सभी से यह विनम्र अपील हैं कि आप सभी विचार क्रान्ति अभियान की इस अभिनव योजना से जुड़े और अधिकाधिक लोगों को इस योजना से जोड़ने का प्रयास करावें।

    जनमानस परिष्कार मंच
    http://yugnirman.blogspot.com/2010/01/blog-post.html

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