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Friday, November 22, 2013

Tablet O Tablet


When I bought my first tablet, tablets had just been new as a segment. Not much to choose from and the costs were exorbitant for their features. We were conversant with either phones on which we could read too, or the eReaders. Tablets looked a leap of improvement over laptops and existing mobile phones.  

Possessing a tablet has been a thrilling experience. Being new to the word ‘tablet’ for a device, my wife handed over the regular medical tablet to me once, when I requested her to handover to me the tablet. Seven inch tablet looked just like a standard novel and it proved to be so similar that, once it was given to the raddiwalah alongwith other old newspapers, magazines and books. It was only to the credit of the raddiwalah that he noticed and returned it. 

Tablet gives immense freedom to book lovers. One can read it whatever posture one is comfortable in. This is also free form light constraints. It provides liberty to carry as many books as one needs to be handy with. Extendable memory through cards has been a boon, in addition. Customization of font size liberates it further. However,  it is a bit difficult to imagine tablet without tocuhscreen. Softwares in these tablets, straight away take you to the page which was being read last. These allow different formats to be displayed for reading. 

Best part of tablet is that it allows internet connectivity, though many of the manufacturers insist on dongle than 3G sim, which is a bit drab. Having a sim converts it into a phone as well occasionally. With its bigger screen size, tablet also works perfectly as a gaming device. And now, external Bluetooth keyboards have eased the issue of writing fluently on these tablets, which otherwise used to be a handicap.

Few more things one still aspires to have in a tablet are, battery life of much longer durations, perfected voice & writing recognition softwares and defused screen brightness as that of eReaders. ‘eInk’ based devices appear to be a great promise in this context but this technology lacks strides, is still costly and, color & movie have a long way to go, yet. 

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Saturday, January 26, 2013

आप कौन सा मोबाइल ख़रीदना चाहते हैं



यदि आप फ़ोन ख़रीदने का मन बना रहे हैं तो सैमसंग व सोनी अच्छे नाम है. इनके फ़ोन/क़ीमत की रेंज बहुत ज़्यादा है. इनमें आपको अपनी पसंद के हिसाब से फ़ोन ज़रूर मिल जाना चाहिए. इसके अलावा आप कार्बन और माइक्रोमेक्स भी देख सकते हैं इनके फ़ोन भी उतने ही अच्छे हैं, इन दोनों कंपनियों के फ़ोन सैमसंग व सोनी से सस्ते मिलेंगे. बैस्ट तरीक़ा इंटरनेट पर सर्च ही है जहां आपको लगभग हर मॉडल के विस्तृत Specification व कीमत की जानकारी मिलेगी.

मेरी पसंद के फ़ोन में कम से कम ये सब तो होना चाहिए :-
बड़ा कैपेस्टिव टच स्क्रीन जो 4 इंच से कम तो नहीं ही हो
नवीनतम एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम
2 सिम कार्ड और 32 जीबी एसडी कार्ड स्लॉट
कैमरा 5 मेगापिक्सल से कम न हो
बैटरी का mAhऔर प्रोसेसर की पॉवर जितनी ज्यादा हो उतना बेहतर व
क़ीमत और वज़न जितना कम उतना ही अच्छा


जिन फ़ोन में ऊपर लिखे फ़ीचर होंगे उनमें आमतौर से 3G/ वीडीयो/ संगीत/ ब्लूटूथ/ वाई फ़ाई आदि की सुविधा तो होती ही है.

सवाल टैबलेट (टैब) और स्मार्टफ़ोन के बीच अंतर का भी उठता है. इनमें बस दो ही अंतर हैं :-
एक, बड़ा स्क्रीन होने के कारण टैबलेट (टैब) को आमतौर से पढ़ने के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि स्मार्टफ़ोन का मुख्य उद्देश्य फ़ोन का काम करना है. जबकि सच्चाई यह है कि दोनों में ही सभी फ़ंक्शन एक से ही होते हैं यहां तक कि आप टैबलेट से फ़ोन की तरह बात भी कर सकते हैं. मुझे व्यक्तिगत तौर पर वह टैब पसंद नहीं जिनमें 3G सुविधा सिम के बजाय डोंगल से दी जाती हो.

दूसरा है साइज़, 7 इंच या इससे बड़े साइज़ के उपरण को टैबलेट (टैब) कहा जाता है जबकि इससे छोटे स्क्रीन वाले फ़ोन को स्मार्टफ़ोन. जिन फ़ोन में उपरोक्त पैरे वाली ख़ूबियां नहीं होतीं उन्हें आजकल केवल फ़ोन कहते हैं. आजकल, 5 इंच से 7 इंच के बीच के साइज़ वाले सक्रीन-फ़ोन को फ़ैबलेट कहने का रिवाज़ भी चल निकला है यानि, फ़ोन+ टैबलेट शब्दों का सम्मिश्रण.

टैब या स्मार्टफ़ोन की मैमोरी बहुत कम होती है इसका मतलब है कि इनके लिए बनाए जाने वाले साफ़्टवेयर में वे सभी फंक्शन नहीं हो सकते जो हम डेस्कटॉप वगैहरा पर प्रयोग करते आए हैं. आजकल फ़ोन का जीवनकाल 2 से 3 साल तक माना जाता है इस दौरान आमतौर से इनमें कोई बहुत बड़ी दिक़्कत नहीं आती पर कभी कोई पीस ही ख़राब निकल आए तो वह दुर्भाग्य ही होगा. इसलिए आप अपनी पसंद का फ़ोन ख़रीदें बहुत चिंता की ज़रूरत नहीं.
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Saturday, October 27, 2012

‘सरफ़ेस’, ‘वि‍न्डोज़ 8’ और ‘वि‍न्डोज़ RT’ के बारे में जानि‍ए.


26 अक्‍टूबर, 2012 को माइक्रोसॉफ़्ट ने दो काम कि‍ए एक, इसने नया ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम ‘वि‍न्‍डोज़ 8’ जारी कि‍या दूसरे, ‘सरफ़ेस’ नामक टैबलेट की बि‍क्री शुरू की.

‘वि‍न्‍डोज़ 8’ पहला ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम है जो डैस्‍कटॉप/लैपटॉप और मोबाइल/टैबलेट पर समान रूप से चल सकेगा. वर्ना अभी तक डैस्‍कटॉप और मोबाइल/टैबलेट के लि‍ए अलग अलग ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम ही बनाए जाते रहे हैं. लेकि‍न, इसका मतलब ये भी है कि‍ डैस्‍कटॉप/लैपटॉप के लि‍ए इन्सटॉल कि‍या जाने वाला संस्‍करण, मोबाइल/टैबलेट वाले संस्‍करण से, नि‍श्‍चय ही, कहीं अधि‍क स्‍पेस खाने वाला होगा. या कहें कि‍ मोबाइल/टैबलेट संस्‍क्‍रण इसका स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण होगा. दूसरे शब्‍दों में, इ‍सका मतलब ये भी है कि‍ मोबाइल/टैबलेट वाले संस्‍करण में वे सभी काम, अभी भी, ठीक वैसे ही नहीं कि‍ए जा सकेंगे जैसे डैस्‍कटॉप/लैपटॉप वाले संस्‍करण में संभव होगा. इसे टच और पारंपरि‍क कीबोर्ड/माउस दोनों ही तरीकों से प्रयोग कि‍या जा सकेगा.

इस प्रकार, यह इस दि‍शा में नई पहल है. ये भी संभव है कि‍ अब डैस्‍कटॉप/लैपटॉप पर प्रयोग कि‍ए जाने वाले तमाम सॉफ़्टवेयर के अलग संस्‍करण, मोबाइल/टैबलेट के लि‍ए भी बनाए जाने लगें, ठीक वैसे ही जैसे .doc, .pdf इत्‍यादि‍ के लि‍ए पहले ही यह उपलब्‍ध हैं. डैस्कटॉप पर चलने वाले कई सॉफ़्टवेयरों के स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण माइक्रोसॉफ़्ट ने पहले से ही अपनी साइट पर होस्‍ट कर दि‍ये हैं, इसीलि‍ए बताया जा रहा है कि‍ ‘वि‍न्‍डोज़RT’ वाले मोबाइल/टैबलेट वालों को ये वहीं से डाउनलोड करने होंगे.

‘सरफ़ेस’ इस क्षेत्र में एक क्रांति‍कारी पहल साबि‍त होनी चाहि‍ए. कारण:- यह एक पतला टैबलेट है जि‍स पर दो तरह के physical keyboard बि‍ना तारों के अटैच हो सकते हैं; एक, आम कीबोर्ड जैसा तो दूसरा टचकीबोर्ड जैसा, और ये दोनों ही कीबोर्ड भी बहुत पतले हैं जो कि‍ इस टैबलेट के कवर का काम भी करते हैं, डैस्‍कटॉप/लैपटॉप जैसी कंप्‍यूटिंग क्षमताओं के चलते यह अपनी तरह का पहला टैबलेट है. माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि‍ वह इसपर चलने में सक्षम, डैस्‍कटॉप/लैपटॉप पर चलने वाले अन्‍य सॉफ़्टवेयर भी उपलब्‍ध करवाएगा.

हालांकि‍ ‘आसुस’ का ट्रांसफ़ार्मर भी इसी श्रेणी में आया था पर वह नहीं चला क्‍योंकि‍ वह न तो आकर्षक था और न ही ‘सरफ़ेस’ जि‍तना पतला, बल्‍कि‍ वह thuddy दि‍खता है. ‘सरफ़ेस’ वि‍न्‍डोज़ 8 पर नहीं बल्‍कि‍ ‘वि‍न्‍डोज़RT’ ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम पर चलता है जि‍से आप ‘वि‍न्‍डोज़ 8’ का स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण भी कह सकते हैं.

भारत में ‘सरफ़ेस’ अभी ebay.in पर ही उपलब्‍ध है और कीमत भी काफी ज़्यादा है. इसलि‍ए अभी प्रतीक्षा करना बेतहर होगा क्‍योंकि‍ जहां एक ओर, आने वाले समय में, माइक्रोसॉफ़्ट इसकी कीमत कम करेगा ही दूसरी ओर, अन्‍य नि‍र्माताओं के बहुत से वि‍कल्‍प भी जल्‍दी ही बाज़ार में आएंगे.

हार्डवेयर के मामले में माइक्रोसॉफ़्ट की प्रति‍ष्‍ठा नहीं रही है पर यह एक नया रास्‍ता तो खोल ही रहा है जि‍सके कारण बाज़ार में अब नई तरह के उपकरण आने प्रारम्‍भ होंगे.

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-काजल कुमार

Saturday, June 23, 2012

टैबलेट ख़रीदने ख़रीदने से पहले जानि‍ए


यदि‍ आप टैबलेट ख़रीदने का मन बना रहे हैं तो आपको कुछ बातें ज़रूर जान लेनी चाहि‍ए जैसे,

1              टैबलेट टाइप करने के लि‍ए उपयुक्‍त नहीं होते. इसलि‍ए इनसे  लैपटॉप/डैस्‍कटॉप जैसी टाइपिंग की सुवि‍धा नहीं मि‍लती. टैबलेट पर टाइपिंग का बस छोटा मोटा काम ही कि‍या जा सकता है.

2              7 इंच के कि‍सी भी टैबलेट को कहीं भी ले जाना बहुत आसान है. ये कि‍सी नॉवल जैसी कि‍ताब के साइज़ के होते हैं.  इसमें आप नोटस लि‍ख सकते हैं,  ई-बुक व दूसरे फ़ार्मेट पढ़ सकते हैं, फ़ि‍ल्‍म देख सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं,  इंटरनेट सर्फिंग कर सकते हैं और कुछ डाउनलोड भी कर सकते हैं. इंटरनेट के लि‍ए लैपटॉप में आमतौर से डॉंगल लगाए जाते हैं जबकि‍ अधि‍कांश टैबलेट में इसकी ज़रूरत नहीं होती, 3जी सि‍म कार्ड से ही काम चल जाता है.

3              अब 10 इंच के टैबलेट भी आ रहे हैं जो कि‍ मेरी पसंद हैंइन पर कुछ भी पढ़ना, 7 इंच वालों से अधि‍क सुगम है.

4              मैक-एअर / asus transformer भी देखे जा सकते हैं यदि‍ आपका बजट कोई वि‍शेष सीमा न रखता हो. ये दोनों लैपटॉप हैं इसलि‍ए इन दोनों में कीबोर्ड भी हैं. मैक-एअर बहुत हल्‍का है व साइज़ भी ज़्यादा बड़ा नहीं है क्‍योंकि‍ ये दो साइज़ में आता है. Asus transformer में कीबोर्ड अलग कर इसे टैबलेट की तरह भी प्रयोग कि‍या जा सकता है. आने वाले कुछ महीनों में इसी श्रेणी के कई और उत्‍पाद बाज़ार में आने वाले हैं.

5              एक और कैटेगरी नोटबुक/अल्‍ट्राबुक की भी है. ये लैपटॉप से आकार में छोटी हैं व टैबलेट के सभी काम भी करती हैंआप चाहें तो इसे भी ट्राई कर सकते हैं. अल्‍ट्राबुक, नोटबुक के बाद की पीढ़ी से हैं व तकनीकि‍ रूप से कहीं बेहतर हैं.

आजकल 'सैमसंग गैलेक्‍सी नोटभी आ रहा है यह टैबलेट के सभी काम करता है और साथ ही इसे फ़ोन की तरह भी प्रयोग कि‍या जा सकता है. कि‍न्‍तु इसका सक्रीन साइज़ नि‍श्‍चय ही छोटा है.

5              naaptol.com जैसी साइट संबंधि‍त वि‍भिन्‍न जानकारि‍यों के लि‍ए देखी जा सकती हैं. ‍ गेलेक्सी टेबलेट नि‍:संदेह अच्‍छा है. इनके अति‍रि‍क्‍त ऑलि‍व व माइक्रोमेक्‍स भी देखे जा सकते हैं. उनकी साइट ये हैं http://www.olivetelecom.in/laptop/olivepad/  http://micromaxfunbook.com/features.html#featuresयदि‍ आप ख़रीदने से पहले कि‍सी मॉल में जाकर टैवलेट देख सकें तो कहीं बेहतर होगा.

6              अधि‍कांश टैबलेट एंड्रॉयड आधारि‍त हैं इसलि‍ए जांच लें कि‍ इसमें एन्‍ड्रॉयड का नवीनतम संस्‍करण होना चाहि‍ए. लेने से पहले ठीक से ज़रूर जांच लें कि‍ उसपर हि‍न्‍दी साइट देखी जा सकती हैं या नहीं क्‍योंकि‍ कुछ टैबलेट नि‍र्माता इनमें हि‍न्‍दी स्‍पोर्ट करने वाले फ़र्मवेयर नहीं डालते हैंइसका स्‍क्रीन कपैस्‍टि‍व टच स्‍क्रीन होना चाहि‍ए न कि‍ रैसि‍स्‍टि‍व टच स्‍क्रीन. इसे वाई-फ़ाई सपोर्ट करना चाहि‍ए. इसमें मैमोरी कार्ड जोड़ने की सुवि‍धा होनी चाहि‍ए. इसमें इंटरनेट डॉंगल से नहीं बल्‍कि‍ 3जी सि‍म कार्ड से चलना चाहि‍ए. आजकल 1 जी.बी. से कम क्षमता वाले प्रोसेसर फ़ैशन में नहीं हैं.

अब नि‍र्णय आपको करना है.
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Thursday, December 1, 2011

क्या आपके मोबाइल में टचपैल कीबोर्ड नहीं है ? अफ़सोस, आप पीछे छूट गए…


सबसे पहले तो यह बात साफ कर दूं कि यह ‘टचपैल कीबोर्ड’ केवल टचफ़ोन के लिए है. और यह केवल अंग्रेज़ी व दूसरी यूरोपीय भाषाओं के लिए ही है. भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए यह सक्षम नहीं है. इससे आप मोबाइल पर, डैस्कटाप की ही तरह, लंबे-लंबे लेख तक आराम से लिख सकते हैं.


 इस पर आपको परंपरागत तरीक़े से बटन दबा दबा कर टाइप करने की आवश्यकता नहीं होती. आपको बस अक्षरों पर अपनी उंगली रख कर दूसरे अक्षरों तक घसीट कर ले जानी भर होती है व शब्द पूरा होने पर ही स्क्रीन से उठानी होती है. जैसे India लिखने के लिए आप I पर उंगली रखिए फिर उसे n पर ले जाइए वहीं से आगे d पर… इसी प्रकार आगे. इसमें आपको इस बात से भी डरने की ज़रूरत नहीं कि उंगली थोड़ी आगे-पीछे रह गई तो क्या होगा, ऐसे में  कीबोर्ड अपने डाटाबेस से आपने आप अंदाज़ लगा लेता है कि आप क्या शब्द लिखना चाह रहे हैं. हां कई ऐसे शब्द जो इसे नहीं पता, उनके लिए आपको पहले की ही तरह एक एक अक्षर दबा कर ही लिखना होता है. एंड्रायड पर यह मुफ़्त है. माइक्रोसोफ़्ट के कारण अब यह विंडो मोबाइल 6x के लिए बंद कर दिया गया है. डाउनलोड कर आनंद उठाएं.

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