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Monday, March 10, 2014

हिंदी ईबुक रीडर के बारे में जानि‍ए.



हिंदी ईपब का फ़ोन स्‍नैप

आपने ईबुक रीडर का नाम अवश्‍य सुना होगा. ‘ईबुक’ का अर्थ है इलेक्‍ट्रॉनि‍क बुक यानि‍ वह पुस्‍तक जो इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरण पर पढ़ी जा सके. इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों की श्रेणी में स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट इत्‍यादि‍ आते हैं. इनके अति‍रि‍क्‍त इस उद्देश्‍य के लि‍ए ‘ईबुक रीडर’ अलग से आते हैं जो कई कंपनि‍यां बनाती हैं जि‍नमें किंडल सर्वाधि‍क प्रचलि‍त है. इसके अति‍रि‍क्‍त कोबो, सोनी, स्‍टैन्‍ज़ा इत्‍यादि‍ के भी ईबुक रीडर बाज़ार में उपलब्‍ध हैं.
इन इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर पढ़ी जाने वाली पुस्‍तकों के कई फ़ार्मेट बाज़ार में प्रचलि‍त हैं जैसे:- .mobi  किंडल के लि‍ए, .rtf, .epub और .pdf अधि‍कांश इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों, स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट आदि‍ के लि‍ए, .lrf सोनी रीडर के लि‍ए, . pbd पामरीडिंग उपकरणों के लि‍ए, .txt फ़ार्मेट को भी अधि‍कांश उपकरण पढ़ सकते हैं एवं इसे वैबपेज की तरह ब्राउजर में भी पढ़ा जा सकता है. किंतु ‘ईपब’ फ़ार्मेट अधि‍कांश इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों, स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट इत्‍यादि‍ में पढ़े जाने के कारण सर्वाधि‍क लोकप्रि‍य होता जा रहा है.

हिंदी में, ईबुक रीडर के नाम पर भ्रांति‍ सी दि‍खाई देती है क्‍योंकि‍ हिंदी की सामग्री अभी पीडीएफ़ जैसे फ़ार्मेट में ही उपलब्‍ध है. जि‍से पाठक वास्‍तव में एक चि‍त्ररूप में ही अपने इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों/स्‍मार्टफ़ोन पर पढ़ पाते हैं. जबकि‍ ये इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों/स्‍मार्टफ़ोन अंग्रेज़ी व अन्‍य वि‍देशी भाषाओं के शब्‍दों को शब्‍दरूप में दि‍खाते हैं. अति‍रि‍क्‍त इसके, यूनि‍कोड में लि‍खे एम.एस. वर्ड जैसे फ़ार्मेट भी प्रचलि‍त हैं.
‘किंडल’ और ‘किंडल फ़ायर’ दो प्रचलि‍त ईबुक उपकरण हैं. ‘किंडल’, ई-इंक (E Ink) आधारि‍त उपकरण है जबकि‍ अमेज़न कंपनी का ‘किंडल फ़ायर’ आम एल.सी.डी. टैबलेट जैसा उपरण है. किंडल मुख्‍यत: पुस्‍तकें पढ़ने के लि‍ए बनाया बनाया गया है इसलि‍ए इसमें संगीत, वीडि‍यो, कैमरा, ईमेल आदि‍ की सुवि‍धा नही है जबकि‍ ‘किंडल फ़ायर’ में ये सभी सुवि‍धाएं भी है.
इन इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर पढ़ी जा सकने वाली सामग्री वि‍भि‍‍न्‍न फ़ार्मेट में लि‍खी जाती है जि‍नमें ईपब (.epub) आज सर्वाधि‍क प्रचलि‍त फ़ार्मेट है. इसका वि‍कास अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल प्रकाशन फ़ोरम (http://idpf.org/) ने कि‍या है. यह एक ओपन फ़ार्मेट है, जबकि‍ कई दूसरे फ़ार्मेट कंपनि‍यों के ट्रेडमार्क युक्त फ़ार्मेट हैं एवं अन्‍य सभी कंपनि‍यों के इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर कार्य भी नहीं करते हैं. ‘ईपब’ का मतलब है ‘इलेक्‍ट्रॉनि‍क पब्‍लि‍केशन’. 2007 से,  यह अपने पूर्ववर्ती फ़ार्मेटों की जगह लाया गया था.
इस फ़र्मेट की वि‍शेषताएं यह हैं कि‍ इसमें लि‍खी गई सामग्री स्‍क्रीन साइज़ के हि‍साब से स्‍वव्‍यवस्‍थि‍त हो जाती है यानि‍ फ़ॉट का साइज़ बढ़ाया जाए तो शब्‍द, सक्रीन के साइड में न छुप कर अपने आप नि‍चली लाइनों में व्‍यवस्‍थि‍त हो जाते हैं, इसी प्रकार फ़ॉंट का साइज़ घटाने पर इसके उलट प्रकि‍या होती है. इस फ़ार्मेट में चि‍त्र भी व्‍यवस्‍थि‍त कि‍ए जा सकते हैं. इस फ़ार्मेट में फ़ॉंट का साइज़ तो बढ़ाया-घटाया जा ही सकता है, फ़ॉंट और बैकग्राउन्ड का रंग भी अपनी पसंद/सुवि‍धानुसार बदला जा सकता है, यद्यपि‍ यह सुवि‍धा इस फ़ार्मेट को चलाने वाले सॉफ़्टवेयर में होती है न कि‍ फ़ार्मेट में, यह फ़ार्मेट इस प्रकि‍या के लि‍ए सक्षम होता है. इसके अति‍रि‍क्‍त इसमें ऑडि‍यो-वीडि‍यो की भी सुवि‍धा रहती है. अंग्रेज़ी में लि‍खी गई सामग्री को तो पढ़ने के बजाय सुना भी जा सकता है. हिंदी पाठ्यसामग्री को अभी हिंदी में सुनने की यह सुवि‍धा उपलब्‍ध नहीं है
यद्यपि‍ यूनि‍कोड आधारि‍त फ़ॉंट में लि‍खे गए .doc / .docx दस्‍तावेज इन फ़ार्मेट को सर्पोट करने वाले सॉफ़्टवेयर में पढ़े जा सकते हैं पर इनमें वे सभी उपरोक्‍त सुवि‍धाएं नहीं होतीं जो ईपब फ़ार्मेट में उपलब्‍ध हैं.
Calibre Software

आप फ़ाइलों को हिंदी ईपब फ़ॉर्मेट में ‘कैलि‍बर’ सॉफ़्टवेयर द्वारा कन्‍वर्ट कर सकते हैं. अभी यूनि‍कोड में लि‍खे गए केवल .docx डॉक्‍यूमेंट्स को ही हिंदी ईपब फ़ॉर्मेट में कन्‍वर्ट कि‍या जा सकता है. जबकि‍ पीडीएफ़ को ईपब में कन्‍वर्ट करने से अभी आशानुरूप परि‍णम नहीं मि‍लते हैं, आशा की जानी चाहि‍ए कि‍ भवि‍ष्‍य में यह भी सफलतापूर्वक कि‍या जा सकेगा. फ़ार्मेट बदलने के लि‍ए प्रयोग कि‍या जाने वाला ‘कैलि‍बर’ सॉफ़्टवेयर आज सर्वाधि‍क प्रचलि‍त सॉफ़टवेयर है और यह मुफ़्त व ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर है. इसे आप यहां http://calibre-ebook.com/ से डाउनलोड कर सकते हैं. गर्व की बात है कि‍ यह सॉफ़्टवेयर एक भारतीय द्वारा बनाया गया है. यदि आपका इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरण/ स्‍मार्टफ़ोन, एंड्रॉयड आधारि‍त और हिंदी स्‍मर्थि‍त है तो हिंदी फ़ाइलों को ईपब फ़ार्मेट  में बदल लेने के बाद आप उन्‍हें FBReader या Moon+ Reader सॉफ़्टवेयर में पढ़ सकते हैं. ये दोनों सॉफ़्टवेयर गूगल प्‍ले स्‍टोर पर मुफ़्त उपल्‍ब्‍ध हैं. एफबीरीडर एंड्रॉयड के अलावा विंडोज़, मैक, लीनक्‍स इत्‍यादी दूसरे ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम पर भी काम करता है. एफबीरीडर में यदि‍ कहीं-कहीं कुछ शब्‍द आपस में जुड़े दि‍खाई दें तो सैटिंग्स में जाकर उन्‍हें ठीक कि‍या जा सकता है. एफबीरीडर की तुलना में मूनप्‍लसरीडर सॉफ़्टवेयर अवश्‍य कुछ धीमा है. हिंदी में ईपब अभी अपने शैशवकाल में है, इस दि‍शा में बहुत काम कि‍ए जाने की आवश्यकता है. मैंने अभी तक कि‍सी प्रकाशक को हिंदी की पुस्‍तकें ईपब  फ़ार्मेट में उपलब्‍ध कराते नहीं पाया है. यद्यपि‍ हिंदी पुस्तकें .doc / .docx फ़ार्मेट में उपल्‍बध होने लगी हैं. लेकि‍न, यदि‍ आप हिंदी प्रेमी हैं और हिंदी की पुस्‍तकें अपने हि‍साब से पढ़ना चाहते हैं तो अब आप उन्‍हें  उपरोक्‍त वि‍धि‍ से कन्‍वर्ट कर अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं और अपनी सुवि‍धानुसार पढ़ सकते हैं.
Moon+ Reader
FBReader

हिंदी प्रकाशकों को भी इस दि‍शा में बड़ी पहल करने की आवश्‍यकता है कि‍ वे पारंपरि‍क रूप से केवल काग़ज़ पर ही छापने के बजाय इलेक्‍ट्रॉनि‍क फ़ार्मेट में भी पुस्‍तकें उपलब्‍ध करवाना शुरू करें इससे पुस्‍तकों की क़ीमत में भारी कमी की जा सकती है और पुस्‍तकों के बाज़ार का भी बहुत वि‍स्‍तार कि‍या जा सकता है. आज अमेज़न जैसी कई बड़ी कंपनि‍यां प्रत्‍येक पुस्‍तक को इलेक्‍ट्रॉनि‍क फ़ार्मेट में तो बेच ही रही हैं साथ ही साथ लगभग उस प्रत्‍येक फ़ार्मेट में भी उपलब्‍ध करवा रही हैं जि‍स भी फ़ार्मेट में ग्राहक उन्‍हें चाहता है.
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-काजल कुमार

Monday, November 26, 2012

इ-बुक रीडर के बारे में जानि‍ए


    इ-बुक रीडर को इ-रीडर के नाम से भी जाना जाता है. ‘इ’ का मतलब यहां ‘इलेक्‍ट्रॉनि‍क’ है. सबसे पहले यह जान लीजि‍ए कि इ-बुक रीडर आम टैबलेट से कैसे भि‍न्‍न है. टैबलेट जहां मूलत: इंटरनेट ब्राउज़िंग के उद्देश्‍य से बनाए जाते हैं वहीं दूसरी ओर इ-बुक रीडर का मुख्‍य उद्देश्‍य कि‍ताबें पढ़ने के लि‍ए बनाया जाना रहता है. इ-बुक रीडर पर पढ़ने से ऑंखों पर ज़ोर नही पड़ता जबकि‍ टैबलेट पर पढ़ने से कुछ समय बाद ऑंखें थकने लगती हैं. इ-बुक रीडर में आप फॉंट का साइज़ घटा बढ़ा सकते हैं और यह स्‍क्रीन के साइज़ में अपने आप फ़ि‍ट हो जाता है. टैबलेट का स्‍क्रीन LCD स्‍क्रीन होता है. जबकि‍ इ-बुक रीडर के  स्‍क्रीन में eInk या ePaper तकनीक का प्रयोग होता है. eInk/ ePaper में स्‍क्रीन एकदम आम काग़ज़ जैसा ही दि‍खाई देता है. इ-बुक रीडर, टैबलेट की तुलना में आधे वज़न के या उससे भी कम वज़न के होते हैं और ये टैबलेट से पतले भी होते हैं.आम टैबलेट की बैटरी जहां आमतौर से 6-7 घंटे ही चलती है, इ-बुक रीडर को आमतौर से 2 से 4 हफ़्ते में एक बार ही चार्ज करना पड़ता है. अभी जो इ-बुक रीडर बाज़ार में हैं वे मल्‍टीटच स्‍क्रीन वाले नहीं हैं. वे आमतौर से बटनों से ही चलते हैं या बहुत हुआ तो स्‍टाइलस से. इनमें अभी भी रेसि‍स्‍टि‍व स्‍क्रीन का ही प्रयोग होता है न कि कपेस्‍टि‍व स्‍क्रीन का. कपेस्‍टि‍व स्‍क्रीन, रेसि‍स्‍टि‍व स्‍क्रीन से कहीं बेहतर होते हैं. आमतौर से ये 5 से 7 इंच के स्‍क्रीन-साइज़ में आते हैं पर 9.7 इंच के भी बाज़ार में अब आने लगे हैं.

    अभी इ-बुक रीडर ब्‍लैक एंड व्हाइट ही हैं, पहला रंगीन इ-बुक रीडर साल-दो साल पहले ही जारी हुआ है. फ़ुजि‍त्‍सू और ऐक्‍टाको इस क्षेत्र में बड़े नाम हैं. लेकि‍न रंगीन इ-बुक रीडर की कीमत अधि‍क होने के कारण अभी बहुत सुलभ नहीं हैं. लेकि‍न इस रंगीन तकनीक पर बहुत तेज़ी से काम चल रहा है, आशा करनी चाहि‍ए कि‍ 2013 में कई नए नि‍र्माता आधुनि‍क रंगीन इ-बुक रीडर लेकर बाज़ार में आएंगे और इनकी क़ीमत भी गि‍रेगी. टैबलेट में रंग कृत्रि‍म रूप से चटख दि‍खाई देते हैं जबकि‍ रंगीन इ-बुक रीडर में, अपने प्राकृतिक रंगों में होने के कारण सामग्री कुछ कम चमकीली दि‍खाई देती है.

    आपने किंडल, अमेज़न, नुक और बार्न्स एंड नोबल जैसे कई नाम इ-बुक रीडर के संदर्भ में सुने होंगे. आप यह भी जान लीजि‍ए कि‍ यदि आप इनमें से कोई भी इ-बुक रीडर लेते हैं तो इसमें कुछ तो कि‍ताबें मुफ़्त में पहले से ही लोड मि‍लेंगी और कुछ अन्‍य आप लोड कर सकेंगे लेकि‍न उसी कंपनी की वेबसाइट से, जि‍सका इ-बुक रीडर आप लेते हैं. कंपनी की साइट पर दो प्रकार की पुस्‍तकें उपलब्‍ध रहती हैं एक, वे जो मुफ़्त होती हैं दूसरी, वे जि‍नके लि‍ए आपको ऑनलाइन भुगतान करना होगा. इ-बुक रीडर  के लि‍ए कई दूसरे फ़ार्मेट के साथ साथ मुख्‍यत: .epub (इलेक्‍ट्रॉनि‍क पब्‍लि‍केशन) फ़ार्मेट प्रयुक्त होता है. हिंदी या दूसरी भारतीय भाषाओं के लि‍ए कुछ सीमाएं हैं क्‍योंकि अभी यह .epub में उपलब्‍ध नहीं हैं या फि‍र न होने के बराबर ही उपलब्‍ध हैं. भारतीय भाषाओं की पुस्‍तकें आमतौर से .pdf/.doc जैसे फ़ार्मेट में ही उपलब्‍ध हैं. .doc के लि‍ए इन इ-बुक रीडर में हिंदी फ़ाँट उपलब्‍ध हों, यह ज़रूरी नहीं. इन इ-बुक रीडर  में मनचाहे सॉफ़्टवेयर लोड करने की सुवि‍धा नहीं होती, न ही आप इनमें डाउनलोड कि‍ताबें कॉपी कर सकते हैं और न ही दूसरे स्रोतों से इन इ-बुक रीडर में कॉपी कर सकते हैं. बस यूं समझ लीजि‍ए कि‍ आप एक ऐसे घर के अंदर हैं जि‍स पर बाहर से ताला लगा है और उस ताले की चाभी कि‍सी और के पास है. इसी के चलते दूसरी स्‍वतंत्र कंपनि‍यों के इ-बुक रीडर काफ़ी प्रचलि‍त हो रहे हैं जि‍नमें/जि‍नसे आप अपनी मर्ज़ी के अनुसार कुछ भी कॉपी कर सकें.
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-काजल कुमार

Sunday, December 4, 2011

लो अब पढ़ने से भी पीछा छूटा



मोबाइल फ़ोन के जहां अपने फ़ायदे हैं वहीं इसकी अपनी कुछ सीमाएं भी हैं. मोबाइल आज संगीत सुनने के साथ-साथ पढ़ने के माध्यम के रूप में ही बहुत तेज़ी से उभर रहा है. लेकिन, पढ़ने के लिए यह अभी बहुत अच्छा साधन नहीं माना जा रहा क्योंकि एक तो इसके स्क्रीन-साइज़ की अपनी सीमाएं हैं तो दूसरी ओर चलते-फिरते इस पर कुछ भी पढ़ पाना आसान काम नहीं है.

“कूल-रीडर” विंडोज़, लीनक्स व एंड्रायड तीनों ही प्लेटफ़ार्म पर चलने वाला एक ओपन सोर्स सोफ़्टवेयर है जो साइज़ में ही छोटा नहीं है बल्कि अभी तक मेरे प्रयोग किए गए सभी प्रोग्रामों में सबसे बढ़िया है.

epub (non-DRM), fb2, txt, rtf, html, chm, tcr, doc, pdb जैसे कई फ़ार्मेट को ये पढ़ कर सुना सकता है. आपको बस करना ये है कि जो फ़ाइल आप इसके द्बारा पढ़वाना चाहते हैं उसे उपरोक्त किसी भी फ़ार्मेट में डाउनलोड या कन्वर्ट कर इसे पढ़ने के काम पर लगा दें. फिर आप चाहे उसे मोबाइल के स्पीकर पर सुनें या हैडफ़ोन से, यह आपकी सुविधा है.

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