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Wednesday, April 8, 2020

OTG द्वारा, मोबाइल को कीबोर्ड/माउस से जोड़ें


यदि आपका मोबाइल OTG (On the Go) सपोर्ट करता है तो आप, वायरलेस कीबोर्ड और माउस को मोबाइल से जोड़ सकते हैं. वैसे आजकल आने वाले अधिकतर स्मार्टफोन OTG सपोर्ट करते हैं. 

इसके लिए आपको 'Wireless receiver', जो कि USB डिवाइस होता है, मोबाइल के चार्जिंग पोर्ट (या USB पोर्ट , यदि यह आपके मोबाइल में हो तो ) में लगाना होगा. इसके लिए आपको adopter की जरूरत पड़ सकती है. इसे मोबाइल में लगाने के बाद आपको अपने मोबाइल की सेटिंग्स में जाकर OTG accessibility को activate करना होगा, यदि यह पहले से activate न हो तो. 

उसके बाद, आपका माउस, मोबाइल के स्क्रीन पर ठीक वैसे ही काम करने लगेगा जैसे कि लैपटॉप या डेस्कटॉप पर काम करता  है.

कीबोर्ड default भाषा में काम करेगा. यदि आपने दो भाषाएं इंस्टॉल कर रखी हैं तो Shift+cltr बटन दबाने से दूसरी भाषा टाइप होने लगती है. 

जैसे मेरे मोबाइल में हिंदी के लिए swiftkey कीबोर्ड है. भाषा बदलने के बाद,  आप रोमन में टाइप करते जाएं, वह अपने आप हिन्दी में बदलता जाता है. उदाहरण के लिए यदि 'भारत' टाइप करना है तो कीबोर्ड पर 'bharat' टाइप करें, जैसे ही enter दबायेंगे  तो यह हिंदी में बदल जाएगा. स्क्रीन पर नीचे, 3 वर्ड prediction भी आयेंगी, उनमें से किसी को भी चुनने के लिए, ctrl के साथ वह नंबर दबायें जिस शब्द के लिए नीचे ऑप्शन दिखाई दे रहा हो. 😊 और बस हो गया. शेष आपकी कल्पनाशीलता पर निर्भर करता है. 

यदि कभी आपको लगे कि यह हिंदी टाइप नहीँ कर रहा है और केवल अंग्रेज़ी ही टाइप कर रहा है तो हिंदी कीबोर्ड को अनइंस्टॉल कर के दोबारा इंस्टॉल कर लें. 

यह पोस्ट मोबाइल पर इसी विधि से लिखी गई है. 
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Monday, July 29, 2013

मोबाइल फ़ोन के नंबर यूं संभालि‍ए


मोबाइल फ़ोन में नए नंबर धीरे-धीरे साल दर साल जमा होते रहते हैं. इनमें से कुछ नंबर फ़ोन की मेमोरी में जमा होते रहते हैं और कुछ फ़ोन के सि‍म कार्ड में, और आजकल तो फ़ोन आपको फ़ोन के माइक्रो एस.डी. कार्ड में भी नंबर रखने की सुवि‍धा देते हैं. फोन नंबर पहले हाथ से लि‍खी जाने वाली टेलीफ़ोन डायरि‍यों में लि‍खे जाते थे पर शायद ही आज कोई ऐसा करता हो. हम मोबाइल फ़ोन पर अधि‍क से अधि‍क नि‍र्भर होते जा रहे हैं. ऐसे में यदि‍ मोबाइल फ़ोन खो जाए या उसके फ़ोन नंबर कि‍सी एक हि‍स्‍से से या तीनों हि‍स्‍सों से, कि‍सी भी कारण से, मि‍ट जाएं तो समझ नहीं आता कि‍ पुराने नंबर पाने के लि‍ए क्‍या कि‍या जाए. व्‍यक्‍ति‍ अपने आप को एक दम कटा कटा सा अनुभव करता है.
ऐसे में, अगर आपके पास एक ऐसी सुवि‍धा मुफ़त उपलब्‍ध हो कि‍ आपके फ़ोन नंबर, मोबाइल में लि‍खते समय अपने आप कहीं और भी लि‍खे जाते रहें, जि‍न्हें आप जब चाहें डाउनलोड कर सकें, तो इससे बढ़ि‍या बात और क्‍या हो सकती है. गूगल मेल (‘जीमेल’) में यह सुवि‍धा वि‍शेष रूप से उपलब्‍ध है कि‍ आप अपने मोबाइल फ़ोन नंबर का बैकअप वहां रख सकें, यदि‍ आप यह सुवि‍धा चाहते हैं तो नि‍श्‍चय ही आपका ‘जीमेल’ पर खाता होना आवश्‍यक है जो आप नि‍:शुल्‍क खोल सकते हैं. 

वर्तमान फ़ोन नंबरों का बैकअप जीमेल पर रखने से आपको शुरूआत करनी होगी, जि‍सके लि‍ए आपको सबसे पहले अपने मोबाइल से, वर्तमान फ़ोन नंबरों का बैकअप लेना होगा. बैकअप लेने की यह सुवि‍धा अब लगभग हर फ़ोन में होती है. बैकअप के रूप में बनी फाइल का फ़ार्मेट आमतौर से CSV या vCard होता है. यदि‍ आपके फ़ोन में यह सुवि‍धा नहीं भी है तो आप किसी अन्‍य साफ़्टवेयर कर मदद से आप फ़ोन नंबरों की CSV या vCard फ़ॉर्मेट में एक फ़ाइल बना लें.  बैकअप फ़ाइल को कंप्‍यूटर पर स्‍थानांतरि‍त कर लीजीए.  

उसके बाद आप अपने जीमेल खाते में जाएं और नीचे दि‍खाए गए चि‍त्र-1 के अनुसार, बायीं ओर सबसे ऊपर ‘जीमेल’ (Gmail) शब्‍द के आगे दि‍खाई दे रहे त्रि‍कोण जैसे ड्रॉप डाउन मीनू को क्‍लि‍क करें. इसके बाद जो मीनू आएगा उसमें से आप ड्रॉप डाउन मीनू से ‘कांटेक्‍ट्स’ (Contacts) शब्‍द क्‍लि‍क कीजि‍ए.

 चि‍त्र-1

 
अब आपको नीचे के चि‍त्र-2 में, दायीं ओर खाली कांटेक्‍ट लि‍स्‍ट दि‍खाई देगी. 
चि‍त्र-2


अब आप चि‍त्र-3 के अनुसार ‘मोर’ (More) पर दि‍खने वाला ड्रॉप डाउन मीनू दबाएंगे तो आपको ‘आयात’ (Import) व ‘नि‍र्यात’ (Export) के वि‍कल्‍प दि‍खाई देंगे. इनमें  से ‘आयात’ (Import) बटन दबाकर आप बैकअप फ़ाइल अपने जीमेल खाते में अपलोड कर सकते हैं. सारे नंबर आपके जीमेल खाते में आ जाएंगे. इन नंबरों को आप बाद में ‘नि‍र्यात’ (Export) बटन दबाकर CSV या vCard फ़ॉर्मेट की एक फ़ाइल में बदल पाएंगे. इसी फ़ाइल को आप अपने मोबाइल में स्‍थानांतरि‍त कर, फ़ोन नंबर पुनर्स्‍थापि‍त कर सकते हैं. जीमेल खाते में इसके बाद आप कंप्‍यूटर पर सीधे ही, नंबर जोड़-घटा/संशोधि‍त भी कर सकते हैं. डुप्‍लीकेट नंबर एक दूसरे में वि‍लीन (merge) भी कर सकते हैं.

 चि‍त्र-3


इसके अति‍रि‍क्‍त, यदि‍ आप चाहते हैं तो फ़ोन में जोड़े जाने वाले नंबर मोबाइल में लि‍खते समय अपने-आप आपके जीमेल खाते के बैकअप में भी जुड़ते रहें तो आपको बस इतना करना होगा कि‍ आप अपने फ़ोन की सेटिंग्‍स से Sync (sync शब्‍द अंग्रेज़ी के synchronize का छोटा रूप है, जि‍से हिंदी में समकालन या समक्रमण प्रक्रि‍या के नाम से पुकारा जाता है) वि‍कल्‍प में जाएं और जीमेल में बनाए गए इमेल खाते को फ़ोन से Sync कर लें, ऐसा करने से आप अपने जीमेल खाते को मोबाइल पर ही प्रयोग कर मेल भेज सकेंगे और मेल देख सकेंगे. एक बार आपका खाता आपके मोबाइल से Sync हो जाने पर, आप जब भी कोई नया मोबाइल नंबर अपने मोबाइल में जोड़ना चाहेंगे तो आपसे यह एक वि‍कल्‍प और पूछेगा कि‍ क्‍या आप अपने मोबाइल नंबर को इमेल में Save करना चाहते हैं ? हां, कहने पर यह फ़ोन नंबर , ऊपर बताए गए, आपके जीमेल खाते में वहीं जा जुड़ेगा जहां आपने अपने फ़ोन के बाक़ी नंबरों का बैकअप रखा था. 

आपने कई बार नोट कि‍या होगा कि‍ एक ही फ़ोन नंबर, आपके मोबाइल में कई बार दि‍खाई देता है जबकि‍ आपने वह नंबर केबल एक ही बार  लि‍खा था. ऐसा इसलि‍ए होता है क्‍योंकि‍ वह फ़ोन नंबर यदि‍ चार जगह यानि‍ फोन में, सि‍म कार्ड, माइक्रो एस.डी. कार्ड और इमेल खाते में है और आपने ‘सभी नंबर दि‍खाएं’ (show all) वि‍कल्‍प चुना है तो आपको वह नंबर चार बार दि‍खाई देगा. इसलि‍ए आपको चाहि‍ए कि‍ आप अपने मोबाइल नंबर एक ही जगह save करें और केवल उन्‍हें ही दि‍खाने का वि‍कल्‍प चुनें. 

इसी प्रकार, हो सकता है कि‍ जो नंबार आपने इमेल में अभी जोड़ा है वह आपको मोबाइल में तत्‍काल दि‍खाई न दे. ऐसा इसलि‍ए होता है क्‍योंकि‍ आपका जोड़ा हुआ नंबर अभी आपके इमेल खाते में स्‍थानांतरि‍त नहीं हुआ है, जोड़े गए नंबर को मोबाइल फोन से इमेल में स्‍थानांतरि‍त करने के लि‍ए आपको मोबाइल, अपने इमेल खाते से  Sync करना होगा. ऐसा करने से आपके द्वारा नया जोड़ा गया नंबर जा कर इमेल खाते में जुड़ जाएगा और दूसरे नंबरों के साथ-साथ अब यह नया नंबर भी आपके मोबाइल फ़ोन पर दि‍खाई देने लगेगा. ठीक इसी तरह, यदि‍ आपने कोई नंबर सीधे अपने इमेल खाते में  जोड़ा है तो वह भी आपको तब तक अपने मोबाइल पर दि‍खा ई नहीं देगा जब तक आप अपने मोबाइल और इमेल खाते को आपस में Sync नहीं कर लेते.  मुझे नहीं लगता कि‍ आपको यह बताने की आवश्‍यकता है कि‍ मोबाइल और इमेल खाते को आपस में Sync करने के लि‍ए मोबाइल पर इंटरनेट की सुवि‍धा की आवश्‍यकता होगी. 
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Monday, March 25, 2013

एंड्रॉयड मोबाइल की बैटरी को अधि‍क समय तक यूं चलाइए.

यदि‍ आप एंड्रॉयड मोबाइल फ़ोन प्रयोग कर रहे हैं तो आपने पाया होगा कि‍ आपके फ़ोन की बैटरी बहुत जल्‍दी ख़त्‍म हो जाती है. यह बात आमतौर से सभी प्रकार के स्‍मार्टफ़ोन पर लागू होती है. इसका प्रमुख कारण है स्‍मार्टफ़ोन की smartness. वही खूबी जो स्‍मार्टफ़ोन को स्‍मार्ट बनाती है, दरअसल  इसके बैटरी खाने का प्रमुख कारण है क्‍योंकि‍ स्‍मार्टफ़ोन में बहुत से प्रोग्राम, आपके जाने बि‍ना ही, चलते रहते हैं और इसकी बैटरी खाते रहते हैं. पर सचाई यही है कि‍आम उपभोक्‍ता को इन प्रोग्राम के यूं चलते रहने की आवश्‍यकता नहीं होती. इसी वि‍षय पर एक पोस्‍ट यहां भी है.

उपरोक्‍त पोस्‍ट के अलावा, आप चाहें तो अनचाहे प्रोग्राम बंद कर के फ़ोन की बैटरी को और अधि‍क समय तक चला सकते हैं. यदि‍ आपके एंड्रॉयड मोबाइल में आइसक्रीम सैंडवि‍च संस्करण है तो आप अनचाहे प्रोग्राम बंद करने के लि‍ए इस प्रकार जाएं Settings > Developer Options >Background Process Limit > No Background Processes



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-काजल कुमार

Saturday, January 26, 2013

आप कौन सा मोबाइल ख़रीदना चाहते हैं



यदि आप फ़ोन ख़रीदने का मन बना रहे हैं तो सैमसंग व सोनी अच्छे नाम है. इनके फ़ोन/क़ीमत की रेंज बहुत ज़्यादा है. इनमें आपको अपनी पसंद के हिसाब से फ़ोन ज़रूर मिल जाना चाहिए. इसके अलावा आप कार्बन और माइक्रोमेक्स भी देख सकते हैं इनके फ़ोन भी उतने ही अच्छे हैं, इन दोनों कंपनियों के फ़ोन सैमसंग व सोनी से सस्ते मिलेंगे. बैस्ट तरीक़ा इंटरनेट पर सर्च ही है जहां आपको लगभग हर मॉडल के विस्तृत Specification व कीमत की जानकारी मिलेगी.

मेरी पसंद के फ़ोन में कम से कम ये सब तो होना चाहिए :-
बड़ा कैपेस्टिव टच स्क्रीन जो 4 इंच से कम तो नहीं ही हो
नवीनतम एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम
2 सिम कार्ड और 32 जीबी एसडी कार्ड स्लॉट
कैमरा 5 मेगापिक्सल से कम न हो
बैटरी का mAhऔर प्रोसेसर की पॉवर जितनी ज्यादा हो उतना बेहतर व
क़ीमत और वज़न जितना कम उतना ही अच्छा


जिन फ़ोन में ऊपर लिखे फ़ीचर होंगे उनमें आमतौर से 3G/ वीडीयो/ संगीत/ ब्लूटूथ/ वाई फ़ाई आदि की सुविधा तो होती ही है.

सवाल टैबलेट (टैब) और स्मार्टफ़ोन के बीच अंतर का भी उठता है. इनमें बस दो ही अंतर हैं :-
एक, बड़ा स्क्रीन होने के कारण टैबलेट (टैब) को आमतौर से पढ़ने के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि स्मार्टफ़ोन का मुख्य उद्देश्य फ़ोन का काम करना है. जबकि सच्चाई यह है कि दोनों में ही सभी फ़ंक्शन एक से ही होते हैं यहां तक कि आप टैबलेट से फ़ोन की तरह बात भी कर सकते हैं. मुझे व्यक्तिगत तौर पर वह टैब पसंद नहीं जिनमें 3G सुविधा सिम के बजाय डोंगल से दी जाती हो.

दूसरा है साइज़, 7 इंच या इससे बड़े साइज़ के उपरण को टैबलेट (टैब) कहा जाता है जबकि इससे छोटे स्क्रीन वाले फ़ोन को स्मार्टफ़ोन. जिन फ़ोन में उपरोक्त पैरे वाली ख़ूबियां नहीं होतीं उन्हें आजकल केवल फ़ोन कहते हैं. आजकल, 5 इंच से 7 इंच के बीच के साइज़ वाले सक्रीन-फ़ोन को फ़ैबलेट कहने का रिवाज़ भी चल निकला है यानि, फ़ोन+ टैबलेट शब्दों का सम्मिश्रण.

टैब या स्मार्टफ़ोन की मैमोरी बहुत कम होती है इसका मतलब है कि इनके लिए बनाए जाने वाले साफ़्टवेयर में वे सभी फंक्शन नहीं हो सकते जो हम डेस्कटॉप वगैहरा पर प्रयोग करते आए हैं. आजकल फ़ोन का जीवनकाल 2 से 3 साल तक माना जाता है इस दौरान आमतौर से इनमें कोई बहुत बड़ी दिक़्कत नहीं आती पर कभी कोई पीस ही ख़राब निकल आए तो वह दुर्भाग्य ही होगा. इसलिए आप अपनी पसंद का फ़ोन ख़रीदें बहुत चिंता की ज़रूरत नहीं.
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Friday, January 18, 2013

एंड्रायड फ़ोन में स्क्रीनशॉट कैसे लें


एंड्रायड के आइसक्रीम सैंडवि‍च (Ice Cream Sandwich) या इसके बाद के संस्‍करण वाले कुछ फ़ोन में स्क्रीनशॉट लेने का वि‍कल्‍प नहीं मि‍लता है.

 

यदि‍ आप आपने मोबाइल का स्क्रीनशॉट लेना चाहते हैं तो https://play.google.com/store पर जा कर आपको “Screenshot Ultimate” सॉफ़्टवेयर डाउनलोड करना होगा, यह मुफ़्त है (Screenshot Ultimate Pro नहीं, क्‍योंकि‍ इसके लि‍ए कुछ राशि का भुगतान करना होता है यदि‍ आप वि‍ज्ञापनों से छुटकारा चाहते हैं तो). Screenshot लेने के बाद आप अगर पाएं कि रंग कुछ ठीक नही है तो Edit में जाकर "Switch colors" option से Blue & Red को बदल दें, मूल रंग दि‍खने लगेगा. इसकी सैटिंग में जाकर स्क्रीनशॉट लेने का आप अपनी पसंद का तरीक़ा चुन सकते हैं जि‍समें कई वि‍कल्‍प उपलब्‍ध हैं.


Saturday, October 27, 2012

‘सरफ़ेस’, ‘वि‍न्डोज़ 8’ और ‘वि‍न्डोज़ RT’ के बारे में जानि‍ए.


26 अक्‍टूबर, 2012 को माइक्रोसॉफ़्ट ने दो काम कि‍ए एक, इसने नया ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम ‘वि‍न्‍डोज़ 8’ जारी कि‍या दूसरे, ‘सरफ़ेस’ नामक टैबलेट की बि‍क्री शुरू की.

‘वि‍न्‍डोज़ 8’ पहला ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम है जो डैस्‍कटॉप/लैपटॉप और मोबाइल/टैबलेट पर समान रूप से चल सकेगा. वर्ना अभी तक डैस्‍कटॉप और मोबाइल/टैबलेट के लि‍ए अलग अलग ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम ही बनाए जाते रहे हैं. लेकि‍न, इसका मतलब ये भी है कि‍ डैस्‍कटॉप/लैपटॉप के लि‍ए इन्सटॉल कि‍या जाने वाला संस्‍करण, मोबाइल/टैबलेट वाले संस्‍करण से, नि‍श्‍चय ही, कहीं अधि‍क स्‍पेस खाने वाला होगा. या कहें कि‍ मोबाइल/टैबलेट संस्‍क्‍रण इसका स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण होगा. दूसरे शब्‍दों में, इ‍सका मतलब ये भी है कि‍ मोबाइल/टैबलेट वाले संस्‍करण में वे सभी काम, अभी भी, ठीक वैसे ही नहीं कि‍ए जा सकेंगे जैसे डैस्‍कटॉप/लैपटॉप वाले संस्‍करण में संभव होगा. इसे टच और पारंपरि‍क कीबोर्ड/माउस दोनों ही तरीकों से प्रयोग कि‍या जा सकेगा.

इस प्रकार, यह इस दि‍शा में नई पहल है. ये भी संभव है कि‍ अब डैस्‍कटॉप/लैपटॉप पर प्रयोग कि‍ए जाने वाले तमाम सॉफ़्टवेयर के अलग संस्‍करण, मोबाइल/टैबलेट के लि‍ए भी बनाए जाने लगें, ठीक वैसे ही जैसे .doc, .pdf इत्‍यादि‍ के लि‍ए पहले ही यह उपलब्‍ध हैं. डैस्कटॉप पर चलने वाले कई सॉफ़्टवेयरों के स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण माइक्रोसॉफ़्ट ने पहले से ही अपनी साइट पर होस्‍ट कर दि‍ये हैं, इसीलि‍ए बताया जा रहा है कि‍ ‘वि‍न्‍डोज़RT’ वाले मोबाइल/टैबलेट वालों को ये वहीं से डाउनलोड करने होंगे.

‘सरफ़ेस’ इस क्षेत्र में एक क्रांति‍कारी पहल साबि‍त होनी चाहि‍ए. कारण:- यह एक पतला टैबलेट है जि‍स पर दो तरह के physical keyboard बि‍ना तारों के अटैच हो सकते हैं; एक, आम कीबोर्ड जैसा तो दूसरा टचकीबोर्ड जैसा, और ये दोनों ही कीबोर्ड भी बहुत पतले हैं जो कि‍ इस टैबलेट के कवर का काम भी करते हैं, डैस्‍कटॉप/लैपटॉप जैसी कंप्‍यूटिंग क्षमताओं के चलते यह अपनी तरह का पहला टैबलेट है. माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि‍ वह इसपर चलने में सक्षम, डैस्‍कटॉप/लैपटॉप पर चलने वाले अन्‍य सॉफ़्टवेयर भी उपलब्‍ध करवाएगा.

हालांकि‍ ‘आसुस’ का ट्रांसफ़ार्मर भी इसी श्रेणी में आया था पर वह नहीं चला क्‍योंकि‍ वह न तो आकर्षक था और न ही ‘सरफ़ेस’ जि‍तना पतला, बल्‍कि‍ वह thuddy दि‍खता है. ‘सरफ़ेस’ वि‍न्‍डोज़ 8 पर नहीं बल्‍कि‍ ‘वि‍न्‍डोज़RT’ ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम पर चलता है जि‍से आप ‘वि‍न्‍डोज़ 8’ का स्‍ट्रि‍प डाउन संस्‍करण भी कह सकते हैं.

भारत में ‘सरफ़ेस’ अभी ebay.in पर ही उपलब्‍ध है और कीमत भी काफी ज़्यादा है. इसलि‍ए अभी प्रतीक्षा करना बेतहर होगा क्‍योंकि‍ जहां एक ओर, आने वाले समय में, माइक्रोसॉफ़्ट इसकी कीमत कम करेगा ही दूसरी ओर, अन्‍य नि‍र्माताओं के बहुत से वि‍कल्‍प भी जल्‍दी ही बाज़ार में आएंगे.

हार्डवेयर के मामले में माइक्रोसॉफ़्ट की प्रति‍ष्‍ठा नहीं रही है पर यह एक नया रास्‍ता तो खोल ही रहा है जि‍सके कारण बाज़ार में अब नई तरह के उपकरण आने प्रारम्‍भ होंगे.

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-काजल कुमार

Monday, June 11, 2012

मोबाइल फ़ोन ख़रीदने जा रहे हैं ?

आप यदि‍ नया मोबाइल फ़ोन लेना चाह रहे हैं तो आपको समय के साथ चलते हुए स्‍मार्टफ़ोन लेना चाहि‍ए. स्‍मार्टफ़ोन को स्‍मार्टफ़ोन इसीलि‍ए कहते हैं क्‍योंकि‍ यह आम मोबाइल फ़ोन के अलावा भी बहुत से काम कर सकता है.

यूँ तो हज़ारों बातें हैं पर आपको कुछ ज़रूरी बातें ध्‍यान रखनी चाहि‍ए जैसे:-
1.  टच-स्‍क्रीन कैपेस्‍टि‍व हो क्‍योंकि‍ रेसि‍स्‍टिव टच-स्‍क्रीन का ज़माना चला गया और की-पंचिंग वाले फ़ोन का ज़माना तो बि‍ल्‍कुल भी नहीं रहा. कैपेस्‍टि‍व टच-स्‍क्रीन शीशे का होता है जबकि‍ रेसि‍स्‍टिव पर आमतौर से स्‍टाइलस से लि‍खा जाता है, यह शीशे का नहीं होता. रेसि‍स्‍टिव स्‍क्रीन वाले फ़ोन सस्‍ते होते हैं.

2.  बैटरी का mAh, प्रोसेसर, रैम व स्‍क्रीन साइज़ जि‍तना अधि‍क उतना अच्‍छा. 1 जी.बी. प्रोसेसर तो आज होना ही चाहि‍ए जबकि‍ आज इनसे भी आगे ड्यूअल व क्‍वाड प्रोसेसर भी आ रहे हैं.

3. कैमरा भी जि‍तने अधि‍क पि‍क्‍सल का हो वही बढ़ि‍या. अधि‍क पि‍क्‍सल का मतलब है उतनी ही बढ़ि‍या क्‍वालि‍टी की फ़ोटो.

4. माइक्रो एस. डी. कार्ड, 3जी और वाई-फ़ाई स्‍प्‍पोर्ट करे.  माइक्रो एस. डी. कार्ड का मतलब है फ़ोन में अति‍रि‍क्‍त हार्ड-डि‍स्‍क. 3जी से आप मोबाइल पर इंटरनेट प्रयोग कर सकते हैं, यह अब बहुत महँगा भी नहीं है. आजकल कई सार्वजनि‍क स्‍थानों पर वाई-फ़ाई इंटरनेट उपलब्‍ध होने लगा है, यदि‍ आपका फ़ोन वाई-फ़ाई समर्थि‍त है तो आप इसका लाभ उठा सकते हैं.

5. एंड्रॉयड एक मुफ़्त ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम है जि‍सके कारण फ़ोन की क़ीमत तो कम हो ही जाती है, आपको कई तरह के दूसरे सॉफ़्टवेयर भी मुफ़्त मि‍लते हैं. एंड्रॉयड गूगल कंपनी का उत्‍पाद है. एंड्रॉयड के कई संस्‍करण बाज़ार में हैं. इसलि‍ए यह ज़रूरी है कि‍ आप नवीनम संस्‍करण वाला फ़ोन ही लें.

6. एंड्रॉयड में अभी हि‍न्‍दी व दूसरी भारतीय भाषाएं नहीं हैं लेकि‍न फ़ोन बनाने वाली कंपनि‍यां इसे हि‍न्‍दी व दूसरी भारतीय भाषाएं पढ़ने-लि‍खने लायक बना देती हैं इसलि‍ए आप जाँच लें कि‍ फ़ोन पर ये भाषाएं पढ़ी जा सकें.

7. और अंत में, इनकी क़ीमत पांच हज़ार से चालीस हज़ार तक हो सकती है इसलि‍ए ख़रीदने से पहले इंटरनेट पर इनके फ़ीचर वा क़ीमतों की तुलना कर लें.
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Sunday, March 25, 2012

क्या आपके मोबाइल की बैटरी भी कम चलती है ?

(अगर आप केवल मोबाइल बैटरी के बारे में जानना चाहते हैं तो बस अंतिम पैरा पढ़ें, बाक़ी लेख बिना पढ़े भी आपका काम चल जाएगा).


जैसे भारत में कभी कार और हवाई जहाज़ बस अमीरों की सवारी हुआ करते थे लेकिन मारूति और कैप्टेन गोपीनाथ ने जो योगदान इन्हें आम आदमी की सवारी बना देने में किया, वही काम चीन ने मोबाइल के क्षेत्र में किया है.

शरू शुरू में, भारत में मोबाइल-निर्माता फ़ोन के दाम ठीक वैसे ही ऊंचे रखते थे जैसे आज एप्पल अपने आई-फ़ोन के रखता है. और, लोग भी रेस्टोरेंटों मे ख़ास अच्छी ऊंची आवाज़ में बात करके आसपास सबको ये जताने में कोई क़सर नहीं उठा रखते थे कि देखो-देखो उनके पास मोबाइल फ़ोन है, ठस्से से. मोबाइल फ़ोन तब जेब में नहीं बल्कि हाथ में ही रखे जाते थे ताकि सबको पता तो चले. औरतों के लिए तो लेडीज़ पर्सों की ही तर्ज़ पर रंग-बिरंगे छोटे-छोटे नक़्काशीदार थैले-झोले भी बनाए जाते थे जिन्हें ‘पाउच’ के नाम से पुकारे जाने का रिवाज़ था. पर भला हो चीन का जिसने इस पूरी की पूरी मोबाइल संस्कृति की ही रेड़ लगा दी.

चीन ने बाज़ार में एक से एक, ऐसे मोबाइल फ़ोन ला कर ठोक दिए जो क़ीमत में तो 75-80 प्रतिशत तक कम थे पर उनमें फ़ीचर दूसरे प्रचलित फोनों से कही ज़्यादा थे. हालत ये हो गई कि दिल्ली में तो एक मार्केट जो कल तक गफ़्फार मार्केट के नाम से जानी जाती थी उसे ‘चाइनीज़ फ़ोन मार्केट’ ही कहा जाने लगा. मेरा पहला टचफ़ोन एक चाइनीज़ टचफ़ोन ही था. उस वक्त भारत में टचफ़ोन नया-नया आया था और वही एक कंपनी अपने दो-एक मॉडल बाज़ार में 25-27 हज़ार के आसपास बेचती थी जिसके ऑथोराइज़्ड सर्विस (रिपेयर) सैंटरों में आज भी लोग यूं लाइनों में बैठे मिलते हैं जैसे शहर में हैज़ा फैल जाने से डाक्टरों के क्लीनिक मरीज़ों से पटे मिलते हैं. इस कंपनी का, मोबाइल-हैंडसैट-बाज़ार में लगभग एकाधिकार था. भारतीयों को पक्का भरोसा हो गया लगता था कि इस कंपनी के अलावा किसी और को तो मोबाइल फ़ोन बनाना ही कहां आता होगा. और मज़े की बात तो ये है कि आज भी इस कंपनी का जलवा कुछ-कुछ वैसा ही बरकरार है भले ही आज, वो उस बीते कल की बातें याद कर-कर के खून के घूंट पी रही हो. चीन ने, दूसरी मोबाइल कंपनियों को हैंडसैट की क़ीमत कम रखना सिखाया.

वह चाइनीज़ टचफ़ोन क़रीब पांच हज़ार का था. उसकी बैटरी एक बार चार्ज करने पर लगभग चार-पांच दिन तो चलती ही थी जबकि फ़ोन ठीक-ठाक प्रयोग होता था हालांकि मुझे बताया गया था बड़े स्क्रीन वाले फ़ोन ज़्यादा बैटरी खाते हैं. उसपर तुर्रा ये कि एक बैटरी तो फ़ोन में लगा कर दी गई थी, दूसरी बैटरी मुफ़्त अलग से मिली थी. अगर कहीं आना जाता हो तो मुझे चार्जर साथ नहीं रखना होता था बस दूसरी बैटरी भी चार्ज करके साथ ले जाने से ही काम चल जाता था. इसका स्क्रीन भी अच्छा बड़ा था जिसमें फ़ोंट भी बड़े दिखते थे जबकि रंगीन फ़ोनों के स्क्रीन अभी पिद्दे से ही लगते थे और उनमें कुछ पढ़़ना भी मुश्किल होता था. हां, सलेटी सक्रीन वाले फ़ोन के फ़ोंट अपेक्षाकृत बड़े मिलते थे. उसमें .3gp फ़ार्मेट फ़िल्म भी चलती थी. बाद में, सुनने में आया था कि मोबाइल फ़ोन बनाने वाली कंपनियां IMEI नंबर के नाम पर एक दिन मिल कर ‘शेर आया, शेर आया’ चिल्लाईं और भारत में चाइनीज़ फ़ोन बिकने व चलने बंद हो गए. आज उस फ़ोन पर, परिवार की एक बिटिया गाने सुनती है और, वो भी स्पीकर ऑन करके.

आज इन नए आने वाले फ़ोनों में बैटरी पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली हैं लेकिन फिर भी, ठीक-ठाक प्रयोग किए जाने पर किसी भी हाई-फ़ाई फ़ोन की बैटरी शाम तक ख़त्म होने लगती है. इसका कारण ये है कि ये फ़ोन बैकग्राउंड में लगातार कई ऐसे काम करते रहते हैं जिनमें बैटरी की खपत होती रहती है. इनमें सबसे प्रमुख है इ-मेल चैक करने का. जब भी मेल आए तो ये फ़ोन इसकी सूचना बीप से देते हैं. इसके लिए फ़ोन, हर थोड़ी देर में/ एक निश्चित अंतराल के बाद जो काम करता है उसमें बैटरी खर्च होती रहती है. स्क्रीन की चमक 70-80 प्रतिशत कम करने पर बैटरी काफी बचने लगती है. 3G कनेक्शन वाले फ़ोन लगातार डाटा ट्रांसफ़र मोड में रखने से भी बैटरी खाते हैं. जैसे आप विंडो कंप्यूटर में कंट्रोल+ऑल्ट+डेल बटन दवाकर ‘टास्क मैनेजर’ में देख पाते हैं कि कौन-कौन सी गतियिधियां कंप्यूटर की मेमोरी खा रही हैं उसी प्रकार आप अपने फ़ोन में कुछ छोटे-छोट प्रोग्रामों की मदद से, बैकग्राउंड में चलने वाले ग़ैरज़रूरी प्रोग्राम बंद कर सकते हैं. इससे जहां एक ओर, बैटरी की खपत में बचत होगी वहीं दूसरी ओर आपके फ़ोन की स्पीड भी बढ़ जाएगी. एंड्रायड में इसके लिए ‘एंड्रायड अस्सिस्टेंट’ व ‘एंड्रायड बूस्टर’ जैसे कई मुफ़्त साफ़्टवेयर उपलब्ध हैं. इसी तरह के प्रोग्राम नोकिया व एप्पल के लिए भी इनके ‘एप्प स्टोर’/ साइट पर ज़रूर उपलब्ध होने चाहिए.
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-काजल कुमार

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