| यदि आप इंटरनेट कनेक्शन के लिए वायरलेस मोडम प्रयोग कर रहे हैं तो आपको यह विचार ज़रूर आता होगा कि और कौन लोग हैं जो आपके मोडम से जुड़े हैं. यह विचार आपको उस समय तो ज़रूर ही आता होगा जब आपको लगता हो कि इंटरनेट गति कुछ कम लग रही है. उस समय आप जानना चाहते हैं कि यदि कोई दूसरा भी आपके इंटरनेट मोडम का प्रयोग कर रहा हो तो उसे कुछ समय के लिए रूकने को कहा जाए. |
| घर पर या अपने ही कार्यालय में तो वायरलेस मोडम सुविधा की दृष्टि से प्रयोग किये ही जाते हैं. वायरलेस मोडम को सुरक्षित (secured connection) रूप से कनेक्ट करने का प्रावधान तो रहता है पर कई लोग इसका प्रयोग नहीं करते यह सोच कर कि उनके कनेक्शन की डाउनलोड सीमा असीमित है या, कौन हर कंप्यूटर के लिए पासवर्ड बताता घूमे. बात तो सही है पर याद रखना चाहिए कि बैंडविड्थ सीमित होने के कारण जितने अधिक कंप्यूटर इंटरनेट का प्रयोग एक ही समय करेंगे, उनकी गतिसीमा उतनी ही कम हो जाएगी. |
| एक ही वायरलेस मोडम का प्रयोग करते हुए इंटरनेट से जुड़े दूसरे कंप्यूटरों की जानकारी के लिए आप यह छोटा सा फ्रीवेयर http://zamzom.com/ से डाउनलोड कर इंस्टाल कर सकते हैं. Fast Scan बटन से यह आपके कंप्यूटर की जानकारी देता है जबकि, Deep Scan बटन दबाने पर मोडम प्रयोग कर रहे दूसरे कंप्यूटरों की जानकारी देता है. |
| 0-काजल कुमार |
Sunday, January 17, 2010
वायरलेस मोडम प्रयोग करे हो ? तब तो ज़रूर पढ़ें…
Monday, November 30, 2009
यदि आप व्यायाम करते हैं तो सावधान
अमेरिका में 45 से 55 वर्ष आयुवर्ग के 200 लोगों पर किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि इस वर्ग के व्यायाम करने वाले लोगों में घुटनों की चोट की संभावना सर्वाधिक होती है. दूसरे शब्दों में, इसे गठिया बीमारी से जोड़ कर देखा जाता है.
अध्ययन में यह भी पाया गया कि cartilage (उपास्थि) व ligaments में दौड़ने व कूदने जैसे व्यायामों से चोट की संभावना कहीं अधिक बढ़ जाती है जबकि, साइक्लिंग व तैराकी में यह संभावना कहीं कम होती है. इससे पुरुष व स्त्री समान रूप से प्रभावित होते हैं.
इस अवधारणा को भी ग़लत पाया गया है कि यदि जोड़ो में दर्द हो तो इस प्रकार के व्यायामों से आराम मिलता है जबकि सच्चाई यह है कि इस प्रकार के खेल चोट को और अधिक क्षति पहुँचाते हैं. भलाई इसमें है कि डॉक्टर की सलाह से उचित व्यायाम चुनें.
-काजल कुमार
Monday, October 19, 2009
ओह ! कहीं आप भी ये एंटी वायरस तो नहीं ले बैठे ?
| एंटी वायरस बनाने वाली कंपनी सीमेंटिक के हवाले से रायटर ने ख़बर दी है कि आजकल नक़ली एंटी वायरस का जाल बहुत तेज़ी से फैल रहा है. ख़बर के अनुसार लगभग ४.५ करोड़ कंप्यूटरों पर इस समय ऐसे प्रोग्राम लदे पड़े हैं. |
| इन प्रोग्रामों की खूबी ये है कि नेट-सर्फ़िंग के दौरान ये बस यूँ ही प्रकट होते हैं. स्क्रीन पर संदेश आता है कि आपका कंप्यूटर फ़लाँ-फ़लाँ वायरस से प्रभावित है, इसे दूर करने के लिए स्कैन कीजिए. इस वायरस क्लीनर का नाम और डिज़ाइन आपको सुने-देखे से लगेंगे और डाउनलोड का विकल्प भी मिलेगा. इसे दबाते ही आपको लगेगा कि सॉफ़्टवेयर बड़ी तेज़ी से डाउनलोड होकर इंस्टाल हो गया. फिर रिपोर्ट आएगी कि फ़लाँ-फ़लाँ वायरस क्लीन कर दिए गए हैं. |
| वास्तव में कंप्यूटर पर कोई वायरस था ही नहीं अलबत्ता, इस बीच एक स्पाइवेयर कंप्यूटर में बस ज़रूर गया. ऐसे कुछ प्रचलित वायरस हैं SpywareGuard2009, AntiVirus 2009, AntiVirus 2010, Spyware Secure,XP AntiVirus इत्यादि. |
| ये वायरस कंप्यूटर से डाटा तो उड़ा ही लेते हैं, कंप्यूटर का भट्ठा भी बैठा देते हैं. भलाई इसी में है कि मुफ़्त का लालच न किया जाए. |
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| .काजल कुमार |
Sunday, October 18, 2009
OLED एक जादुई अविष्कार है.
| LED के बारे में तो आपने ज़रूर पढ़ा-सुना होगा. आइए आज आपको एक नई तकनीक OLED के बारे में बताएँ. |
| OLED का विचार तो यूँ आधी सदी से भी पुराना है किंतु इसका व्यवसायिक प्रयोग अब जाकर 2004 से होने लगा है क्योंकि इसे प्रखर होने में बहुत समय लग गया. इसकी विशेषता यह है कि इसे किसी भी सतह पर प्रयुक्त किया जा सकता है चाहे वह सपाट शीशा हो या लचीला प्लास्टिक. इसलिए कहा जा सकता है इसके प्रयोग की संभावनाएँ अपार हैं. दृश्य LED स्क्रीन के मुकाबले OLED स्क्रीन पर कहीं बेहतर दिखाई देते हैं. |
| OLED का पूरा नाम है organic light emitting diode. इस तकनीक के अंतर्गत किसी भी सतह पर एक जैवि क पदार्थ लगाया जाता है जिसमें विद्युत प्रवाहित करने से जैवि क पदार्थ चमकने लगता है. इसके अतिरिक्त PLED भी प्रयुक्त होने लगा है, जिसमें जैविक पदार्थ का स्थान पोलीमर (polymer) ने लिया है. OLED की संभावनाओं की एक बानगी यहां क्लिक करके देखें, आपको अपनी आंखों पर भरोसा नहीं होगा. |
| सैमसंग आज OLED का प्रयोग करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. इसके अतिरिक्त सोनी, एल.जी. आदि दूसरी कंपनियाँ भी इसके प्रयोग में पीछे नहीं हैं. इस तकनीक का प्रयोग टी.वी. स्क्रीन, मोबाईल स्क्रीन, डिजिटल कैमरा स्क्रीन आदि में हो रहा है. ईस्टमैन कोडक व अन्य लोगों के पास इस तकनीक के प्रतिलिप्याधिकार हैं. आज सैमसंग, सोनी, एल.जी. के अतिरिक्त ड्यूपांट और जनरल इलेक्ट्रिक ग्लोबल रिसर्च जैसी दूसरी कंपनियाँ भी बड़े पैमाने पर ओलेड पैनेल बना रही हैं. |
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| -काजल कुमार |
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