Saturday, January 17, 2015

क्या आप मोबाइल में अभी भी कीबोर्ड से ही लि‍ख रहे हैं ?

एंड्रॉयड आधारि‍त कि‍सी भी स्‍मार्टफ़ोन और टैबलेट में कीबोर्ड से लि‍खने की आवश्‍यकता अब लगभग समाप्‍त ही हो चली है. अब लि‍खने के बजाय आप बोल कर सीधे ही टाइप कर सकते हैं या फि‍र स्क्रीन पर अंगुली से भी लि‍ख सकते हैं. यदि‍ स्‍क्रीन छोटा है और अंगुली से लि‍खने में असुवि‍धा  होती है तो आप स्‍टाइलस का प्रयोग भी कर सकते हैं. स्‍टाइलस, कई ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्‍ध हैं और बहुत सस्‍ते हैं लेकि‍न इन्‍हें रखना-संभालना भी अपने आप में ही एक काम है इसलि‍ए बेहतर है कि‍ आप अंगुली से ही लि‍खने का कुछ अभ्‍यास कर लें. ये सुवि‍धाएं हिंदी,  अंग्रेज़ी व अन्‍य कई भाषाओं के लि‍ए मुफ़्त उपलब्‍ध हैं.

हिंदी में लि‍खना

इसके लि‍ए आप ‘GoogleHindi Input’ (गूगल हिंदी इनपुट) का मुफ़्त संस्‍करण, ‘गूगल प्‍ले स्‍टोर’ से डाउनलोड कर सकते हैं. इसमें आपको हिंदी और अंग्रेज़ी के कीबोर्ड तो मि‍लेंगे ही, हस्तलि‍पि‍ को अक्षरों में बदलने वाला वि‍कल्‍प भी मि‍लेगा. नि‍म्‍न चि‍त्र में दर्शाए गए स्‍क्रीन के अनुसार आप जो शब्‍द अंगुली से लि‍खेंगे वे स्‍वत: टंकि‍त शब्‍दों में परि‍वर्ति‍त होते चले जाएंगे. इसमें आपको वर्ड प्रैडि‍क्‍शन की भी सुवि‍धा मि‍लती है. आपको दो बातें वि‍शेषत: ध्‍यान रखनी होंगी, कि‍ कि‍सी भी शब्‍द के ऊपर खींची जाने वाले रेखा आप पहले खींच लें, फि‍र उसके नीचे लि‍खें. या फि‍र, शब्‍दों के  ऊपर वाली रेखा का प्रयोग न करें. ऐसा करने से सि‍स्‍टम, इन शब्‍दों को आसानी से पढ़ लेता है. बाद में रेखा लगाने से, सि‍स्‍टम को सही शब्‍द टाइप करने में कुछ कठि‍नाई होती है.
 
 अंग्रेज़ी में लि‍खना

इसी प्रकार, अंग्रेज़ी में लि‍खने के लि‍ए ‘MyScript Stylus’ (माइस्‍क्रि‍प्‍ट स्‍टाइलस) का मुफ़्त संस्‍करण, ‘गूगल प्‍ले स्‍टोर’ से डाउनलोड कर सकते हैं. यह बीटा संस्‍करण है संतोषजनक काम कर रहा है. बहुत लंबे-लंबे वाक्‍य लि‍खने पर यद्यपि‍ यह कुछ धीमा हो सकता है.


बोल कर टाइप करना
एंड्रायड की गूगल आधारि‍त एक सुवि‍धा यह भी है कि‍ आप अंग्रेज़ी के अति‍रि‍क्‍त  हिंदी व अन्‍य भाषाओं में भी बोल कर टाइप कर सकते हैं. इसकी सीमा अभी यह है कि‍ आपको ऑनलाइन होना आवश्‍यक है. फोन/टैबलेट में यह सुवि‍धा नि‍म्‍न क्रम से प्रारम्‍भ की जा सकती है:-  सि‍स्‍टम सेटिंग्स > लेंगुएज एंड इनपुट >  गूगल वॉयस टाइपिंग. इसके बाद आप ‘गूगल वॉयस टाइपिंग’ के सैटिंग्‍स बटन को दबाएं तो नया मीनू आएगा. जि‍समें सबसे ऊपर ‘भाषा’ (Language) के अंतर्गत, हिंदी या अंग्रेज़ी लि‍खा होगा. आप इससे अपनी सुवि‍धानुसार भषा चुन  सकते हैं. आवश्‍यकतानुसार अन्‍य भाषा आप यहीं से जोड़ सकते हैं. बेहतर यह होगा कि‍ आप इस जगह एक ही भाषा का वि‍कल्‍प चुनें. एक से अधि‍क भाषा रखने पर सि‍स्‍टम कभी-कभी ठीक से कार्य नहीं करता है. इससे आप फ़ेसबुक, डाक्‍यूमेंट इत्‍यादि‍ में कहीं भी, बोल कर टाइप कर सकते हैं.   
आप कि‍सी भी कीबोर्ड पर बने माइक के नि‍शान को दबाकर वॉयस टाइपिंग शुरू कर सकते हैं. और ग़लति‍यों को कीबोर्ड की मदद से ठीक कर सकते हैं. नीचे के चि‍त्र में Swiftkey(स्‍वि‍फ्टकी) दर्शाया गया है. यह भी ‘गूगल प्‍ले स्‍टोर’ पर मुफ़्त उपलब्ध है.


इसके अति‍रि‍क्‍त, आप कीबोर्ड पर अंगुली उठाए बि‍ना भी शब्‍द लि‍ख सकते हैं, बस आपको व्‍यंजनों पर अपनी अंगुली बि‍ना उठाए चलानी होगी, जैसा कि‍ दाहि‍नी ओर के चि‍त्र में दि‍खाया गया है. हिंदी में यह सुवि‍धा स्‍वि‍फ़्टकी में, एवं अंग्रेज़ी में यह सुवि‍धा स्‍वि‍फ़्टकी के अति‍रि‍क्‍त गूगल कीबोर्ड में भी उपलब्‍ध है.
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Saturday, March 15, 2014

आइए, एक उपयोगी एप्‍प के बारे में जानें


यदि‍ आप सैर करने जाते हैं, दौड़ लगाते हैं, साइकलिंग करते हैं, तैराकी करते हैं या इसी प्रकार की अन्‍य गति‍वि‍धि‍यों में भाग लेते हैं तो आइए आज अापका परि‍चय एक महत्‍वपूर्ण एप्‍प से करवाया जाए. इसका नाम 'रन्‍टास्‍टि‍क' है जो अंग्रेज़ी के शब्‍द रन और फ़ैंटास्‍टि‍क को जोड़ कर बना है.

यह एप्‍प, आइफ़ोन, एंड्रॉयड, ब्लैकबेरी और विंडोज फोन के लि‍ए उपलब्‍ध है. इसी प्रकार की और भी कई एप्‍प हैं लेकि‍न यह इसलि‍ए पसंद आई क्‍योंकि‍ यह सिंपल है, शुरू होने में ज्‍यदा समय नहीं लेती और आपसे बहुत सारे सवाल नहीं पूछती. 

जब यह एप्‍प चल रही होती है तो यह आपको बताती है कि‍ आपने कि‍तने समय में कि‍तनी दूरी तय की और कि‍तनी कैलोरी जलाईं. बस शर्त यह है कि‍ आपको मोबाइल का जीपीएस सि‍स्‍टम और डेटा कनेक्‍शन ऑन रखने होंगे. वैसे, इससे  कोई बहुत ज्यादा खर्चा नहीं होता है. जब यह एप्‍प कार्य कर रही होती है तो वाकायदा गूगल मैप की तरह एक नक्‍शे पर यह आपकी स्थि‍ति‍ भी दर्शाती है. बीच बीच में आवाज़ से आपको तय की गई दूरी व अन्‍य जानकारी भी देती है. आंकड़े, मोबाइल पर सेव कि‍ए जा सकते हैं ताकि‍ आगे चल कर आप अपनी प्रगति‍ के बारे में जान सकें. 

ऑन करने के बाद आप मोबाइल को जेब में डाल कर भी घूम सकते हैं और चाहें तो हैडफ़ोन/इअरप्‍लग लगा कर साथ-साथ संगीत का आनंद भी ले सकते हैं जि‍से आप अपने मोबाइल से चुन सकते हैं. एंड्रॉयड चालि‍त फ़ोन पर इसे गूगल प्‍लेस्‍टोर से डाउनलोड कि‍या जा सकता है.  यह ऑफ़ीशि‍यल साइट है https://www.runtastic.com/ 
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Monday, March 10, 2014

हिंदी ईबुक रीडर के बारे में जानि‍ए.



हिंदी ईपब का फ़ोन स्‍नैप

आपने ईबुक रीडर का नाम अवश्‍य सुना होगा. ‘ईबुक’ का अर्थ है इलेक्‍ट्रॉनि‍क बुक यानि‍ वह पुस्‍तक जो इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरण पर पढ़ी जा सके. इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों की श्रेणी में स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट इत्‍यादि‍ आते हैं. इनके अति‍रि‍क्‍त इस उद्देश्‍य के लि‍ए ‘ईबुक रीडर’ अलग से आते हैं जो कई कंपनि‍यां बनाती हैं जि‍नमें किंडल सर्वाधि‍क प्रचलि‍त है. इसके अति‍रि‍क्‍त कोबो, सोनी, स्‍टैन्‍ज़ा इत्‍यादि‍ के भी ईबुक रीडर बाज़ार में उपलब्‍ध हैं.
इन इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर पढ़ी जाने वाली पुस्‍तकों के कई फ़ार्मेट बाज़ार में प्रचलि‍त हैं जैसे:- .mobi  किंडल के लि‍ए, .rtf, .epub और .pdf अधि‍कांश इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों, स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट आदि‍ के लि‍ए, .lrf सोनी रीडर के लि‍ए, . pbd पामरीडिंग उपकरणों के लि‍ए, .txt फ़ार्मेट को भी अधि‍कांश उपकरण पढ़ सकते हैं एवं इसे वैबपेज की तरह ब्राउजर में भी पढ़ा जा सकता है. किंतु ‘ईपब’ फ़ार्मेट अधि‍कांश इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों, स्‍मार्टफ़ोन, टैबलेट इत्‍यादि‍ में पढ़े जाने के कारण सर्वाधि‍क लोकप्रि‍य होता जा रहा है.

हिंदी में, ईबुक रीडर के नाम पर भ्रांति‍ सी दि‍खाई देती है क्‍योंकि‍ हिंदी की सामग्री अभी पीडीएफ़ जैसे फ़ार्मेट में ही उपलब्‍ध है. जि‍से पाठक वास्‍तव में एक चि‍त्ररूप में ही अपने इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों/स्‍मार्टफ़ोन पर पढ़ पाते हैं. जबकि‍ ये इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों/स्‍मार्टफ़ोन अंग्रेज़ी व अन्‍य वि‍देशी भाषाओं के शब्‍दों को शब्‍दरूप में दि‍खाते हैं. अति‍रि‍क्‍त इसके, यूनि‍कोड में लि‍खे एम.एस. वर्ड जैसे फ़ार्मेट भी प्रचलि‍त हैं.
‘किंडल’ और ‘किंडल फ़ायर’ दो प्रचलि‍त ईबुक उपकरण हैं. ‘किंडल’, ई-इंक (E Ink) आधारि‍त उपकरण है जबकि‍ अमेज़न कंपनी का ‘किंडल फ़ायर’ आम एल.सी.डी. टैबलेट जैसा उपरण है. किंडल मुख्‍यत: पुस्‍तकें पढ़ने के लि‍ए बनाया बनाया गया है इसलि‍ए इसमें संगीत, वीडि‍यो, कैमरा, ईमेल आदि‍ की सुवि‍धा नही है जबकि‍ ‘किंडल फ़ायर’ में ये सभी सुवि‍धाएं भी है.
इन इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर पढ़ी जा सकने वाली सामग्री वि‍भि‍‍न्‍न फ़ार्मेट में लि‍खी जाती है जि‍नमें ईपब (.epub) आज सर्वाधि‍क प्रचलि‍त फ़ार्मेट है. इसका वि‍कास अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल प्रकाशन फ़ोरम (http://idpf.org/) ने कि‍या है. यह एक ओपन फ़ार्मेट है, जबकि‍ कई दूसरे फ़ार्मेट कंपनि‍यों के ट्रेडमार्क युक्त फ़ार्मेट हैं एवं अन्‍य सभी कंपनि‍यों के इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरणों पर कार्य भी नहीं करते हैं. ‘ईपब’ का मतलब है ‘इलेक्‍ट्रॉनि‍क पब्‍लि‍केशन’. 2007 से,  यह अपने पूर्ववर्ती फ़ार्मेटों की जगह लाया गया था.
इस फ़र्मेट की वि‍शेषताएं यह हैं कि‍ इसमें लि‍खी गई सामग्री स्‍क्रीन साइज़ के हि‍साब से स्‍वव्‍यवस्‍थि‍त हो जाती है यानि‍ फ़ॉट का साइज़ बढ़ाया जाए तो शब्‍द, सक्रीन के साइड में न छुप कर अपने आप नि‍चली लाइनों में व्‍यवस्‍थि‍त हो जाते हैं, इसी प्रकार फ़ॉंट का साइज़ घटाने पर इसके उलट प्रकि‍या होती है. इस फ़ार्मेट में चि‍त्र भी व्‍यवस्‍थि‍त कि‍ए जा सकते हैं. इस फ़ार्मेट में फ़ॉंट का साइज़ तो बढ़ाया-घटाया जा ही सकता है, फ़ॉंट और बैकग्राउन्ड का रंग भी अपनी पसंद/सुवि‍धानुसार बदला जा सकता है, यद्यपि‍ यह सुवि‍धा इस फ़ार्मेट को चलाने वाले सॉफ़्टवेयर में होती है न कि‍ फ़ार्मेट में, यह फ़ार्मेट इस प्रकि‍या के लि‍ए सक्षम होता है. इसके अति‍रि‍क्‍त इसमें ऑडि‍यो-वीडि‍यो की भी सुवि‍धा रहती है. अंग्रेज़ी में लि‍खी गई सामग्री को तो पढ़ने के बजाय सुना भी जा सकता है. हिंदी पाठ्यसामग्री को अभी हिंदी में सुनने की यह सुवि‍धा उपलब्‍ध नहीं है
यद्यपि‍ यूनि‍कोड आधारि‍त फ़ॉंट में लि‍खे गए .doc / .docx दस्‍तावेज इन फ़ार्मेट को सर्पोट करने वाले सॉफ़्टवेयर में पढ़े जा सकते हैं पर इनमें वे सभी उपरोक्‍त सुवि‍धाएं नहीं होतीं जो ईपब फ़ार्मेट में उपलब्‍ध हैं.
Calibre Software

आप फ़ाइलों को हिंदी ईपब फ़ॉर्मेट में ‘कैलि‍बर’ सॉफ़्टवेयर द्वारा कन्‍वर्ट कर सकते हैं. अभी यूनि‍कोड में लि‍खे गए केवल .docx डॉक्‍यूमेंट्स को ही हिंदी ईपब फ़ॉर्मेट में कन्‍वर्ट कि‍या जा सकता है. जबकि‍ पीडीएफ़ को ईपब में कन्‍वर्ट करने से अभी आशानुरूप परि‍णम नहीं मि‍लते हैं, आशा की जानी चाहि‍ए कि‍ भवि‍ष्‍य में यह भी सफलतापूर्वक कि‍या जा सकेगा. फ़ार्मेट बदलने के लि‍ए प्रयोग कि‍या जाने वाला ‘कैलि‍बर’ सॉफ़्टवेयर आज सर्वाधि‍क प्रचलि‍त सॉफ़टवेयर है और यह मुफ़्त व ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर है. इसे आप यहां http://calibre-ebook.com/ से डाउनलोड कर सकते हैं. गर्व की बात है कि‍ यह सॉफ़्टवेयर एक भारतीय द्वारा बनाया गया है. यदि आपका इलेक्‍ट्रॉनि‍क उपकरण/ स्‍मार्टफ़ोन, एंड्रॉयड आधारि‍त और हिंदी स्‍मर्थि‍त है तो हिंदी फ़ाइलों को ईपब फ़ार्मेट  में बदल लेने के बाद आप उन्‍हें FBReader या Moon+ Reader सॉफ़्टवेयर में पढ़ सकते हैं. ये दोनों सॉफ़्टवेयर गूगल प्‍ले स्‍टोर पर मुफ़्त उपल्‍ब्‍ध हैं. एफबीरीडर एंड्रॉयड के अलावा विंडोज़, मैक, लीनक्‍स इत्‍यादी दूसरे ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम पर भी काम करता है. एफबीरीडर में यदि‍ कहीं-कहीं कुछ शब्‍द आपस में जुड़े दि‍खाई दें तो सैटिंग्स में जाकर उन्‍हें ठीक कि‍या जा सकता है. एफबीरीडर की तुलना में मूनप्‍लसरीडर सॉफ़्टवेयर अवश्‍य कुछ धीमा है. हिंदी में ईपब अभी अपने शैशवकाल में है, इस दि‍शा में बहुत काम कि‍ए जाने की आवश्यकता है. मैंने अभी तक कि‍सी प्रकाशक को हिंदी की पुस्‍तकें ईपब  फ़ार्मेट में उपलब्‍ध कराते नहीं पाया है. यद्यपि‍ हिंदी पुस्तकें .doc / .docx फ़ार्मेट में उपल्‍बध होने लगी हैं. लेकि‍न, यदि‍ आप हिंदी प्रेमी हैं और हिंदी की पुस्‍तकें अपने हि‍साब से पढ़ना चाहते हैं तो अब आप उन्‍हें  उपरोक्‍त वि‍धि‍ से कन्‍वर्ट कर अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं और अपनी सुवि‍धानुसार पढ़ सकते हैं.
Moon+ Reader
FBReader

हिंदी प्रकाशकों को भी इस दि‍शा में बड़ी पहल करने की आवश्‍यकता है कि‍ वे पारंपरि‍क रूप से केवल काग़ज़ पर ही छापने के बजाय इलेक्‍ट्रॉनि‍क फ़ार्मेट में भी पुस्‍तकें उपलब्‍ध करवाना शुरू करें इससे पुस्‍तकों की क़ीमत में भारी कमी की जा सकती है और पुस्‍तकों के बाज़ार का भी बहुत वि‍स्‍तार कि‍या जा सकता है. आज अमेज़न जैसी कई बड़ी कंपनि‍यां प्रत्‍येक पुस्‍तक को इलेक्‍ट्रॉनि‍क फ़ार्मेट में तो बेच ही रही हैं साथ ही साथ लगभग उस प्रत्‍येक फ़ार्मेट में भी उपलब्‍ध करवा रही हैं जि‍स भी फ़ार्मेट में ग्राहक उन्‍हें चाहता है.
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-काजल कुमार

Monday, November 25, 2013

आने वाले कल की तकनीक है ई-इंक (eInk)

यदि‍ आपने ई-बुक रीडर देखा है तो आप ई-इंक तकनीक से अवगत हैं. आज, सभी ई-बुक रीडर में इसी तकनीक-आधारि‍त स्‍क्रीन प्रयोग होते हैं, यद्यपि‍ कुछ ई-बुक रीडर अब एल.सी.डी. /एल.ई.डी. (LCD/LED) स्‍क्रीन के साथ भी बाजार में आने लगे हैं लेकि‍न, ई-इंक के बारे में जानकारी रखने वाले लोग इन्‍हें ई-बुक रीडर के बजाय, टैबलेट मानकर ही ख़रीदते हैं क्‍योंकि‍ कि‍सी भी आम टैबलेट और तथाकथि‍त एल.सी.डी. /एल.ई.डी. ई-बुक रीडर में नाम के अलावा कोई अंतर नहीं होता. 

ई-इंक, ‘इलेक्‍ट्रॉनि‍क इंक’ का लघु शब्‍द है. अभी तक हम मोबाईल, टैबलेट इत्‍यादि‍ में शीशे के एल.सी.डी. /एल.ई.डी. स्‍क्रीन/मॉनीटर देखते आए हैं. किंतु आने वाले समय में, हम इनकी जगह मोड़ी जा सकने वाली प्‍लास्‍टि‍क को स्‍क्रीन की तरह प्रयोग होते देखेंगे. इसकी वि‍शेषता यह है कि‍ इसके स्‍क्रीन में चमक नहीं होती और इस पर शब्‍द/ चि‍त्र ठीक वैसे ही दि‍खते हैं जैसे कि‍सी काग़ज पर छपे हुए शब्‍द या चि‍त्र. अब इनमें पूरी तरह टच-आधारि‍त स्‍क्रीन आने लगे हैं जबकि‍ पहले इसके स्‍क्रीन को वि‍शेष पेन यक कीबोर्ड से ही प्रयोग कि‍या जा सकता था.  इसके स्‍क्रीन को सूर्य की रोशनी में भी ठीक वैसे ही पढ़ा जा सकता है जैसे आप कि‍सी दूसरे छपे हुए काग़ज़ को पढ़ते हैं. कई नि‍र्माता ई-बुक रीडर के स्‍क्रीन पर सामने से रोशनी के लि‍ए प्रावधान भी करने लगे हैं जैसा कि‍  एल.सी.डी. /एल.ई.डी. स्‍क्रीन में कि‍या जाता है.

अभी इस तकनीक का प्रयोग ई-बुक रीडर में सर्वाधि‍क हो रहा है. लेकि‍न अब इसे घड़ि‍यों में भी प्रयोग कि‍या जाने लगा है. ये घड़ि‍यां वि‍देशों में आम उपभोक्‍ताओं के लि‍ए ऑन-लाइन उपलब्‍ध हैं. मोबाईल फ़ोन में ई-इंक आधारि‍त स्‍क्रीन का प्रयोग पहले-पहल मोटोरोला ने 2006 में कि‍या था. इस प्रकार ‘मोटोफ़ोन एफ-3’ ई-इंक  स्‍क्रीन वाला दुनि‍या का पहला मोबाइल फ़ोन बन गया. अब, दुनि‍या का पहला एंड्रॉयड-फ़ोन रूसी कंपनी योटाफ़ोन्‍स ने हाल ही में बनाया है जि‍समें इस तकनीक का प्रयोग कि‍या गया है. योटा फ़ोन में दो स्‍क्रीन हैं, एक तो पारंपरि‍क एल.सी.डी. स्‍क्रीन और उसी के पीछे दूसरा ई-इंक स्‍क्रीन. इस मोबाइल फ़ोन में ई-इंक स्‍क्रीन को दूसरे अति‍रि‍क्‍त स्‍क्रीन के रूप में उपलब्‍ध करवाया गया है. इस प्रकार, एल.सी.डी. स्‍क्रीन पर लोग पारंपरि‍क काम कर सकते हैं और ई-इंक स्‍क्रीन को बैक-अप स्‍क्रीन की तरह प्रयोग कर सकते हैं; या कि‍सी भी अन्‍य चि‍त्र या सूचना इत्‍यादि‍ को स्‍थायी रूप से वहां दि‍खाई देने के लि‍ए रख सकते हैं. 
सभी चि‍त्र साभार कंपनी की वेबसाइट http://www.eink.com/

ई-इंक की अवधारणा पर कार्य, अमरीका के प्रसि‍द्ध मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से संबद्ध एक संस्थान ने करना प्रारम्‍भ कि‍या था. अब यह संस्‍थान एक कंपनी में परि‍वर्ति‍त हो कर ‘ई-इंक कारपोरेशन’ के नाम से स्‍वतंत्र रूप से इस क्षेत्र में कार्य कर रहा है.  इससे मि‍लती जुलती कुछ अन्‍य तकनीकों पर भी दूसरी कंपनि‍यां कार्य कर रही हैं पर अभी उन तकनीकों का बाजार में  चलन अधि‍क नहीं हैं.

ई-इंक  स्‍क्रीन बहुत ही महीन छोटे-छोट कैप्‍सूलों से मि‍ल कर बना होता है. प्रत्‍येक कैप्‍सूल में ई-इंक के सफेद कण भरे होते हैं. स्‍क्रीन पर कुछ भी दि‍खाने के लि‍ए कैप्‍सूल के नि‍चले हि‍स्‍से के इन कणों में बि‍जली प्रवाहि‍त की जाती है. बि‍जली प्रवाहि‍त होने से इन नि‍चले कणों का रंग काला हो जाता है और ये सतह के ऊपर की तरफ आ जाते हैं. इस प्रकार हम सतह के ऊपरी हि‍स्‍से में काले रंग में उभरते शब्‍द / चि‍त्र देख पाते हैं. यही कारण है कि‍ यदि‍ इस स्‍क्रीन के कि‍सी हि‍स्‍से को तोड़-मरोड़ या जला कर नष्‍ट भी कर दि‍या जाए तो भी स्‍क्रीन के बाक़ी हि‍स्‍से के वे कैप्‍सूल चि‍त्र/ शब्‍द दि‍खाते रहते हैं जो खंडि‍त नहीं हैं. जबकि‍  एल.सी.डी. /एल.ई.डी. (LCD/LED) स्‍क्रीन अगर कहीं से भी टूट जाए तो पूरे ही स्‍क्रीन पर चि‍त्र आना बंद हो जाता है. दूसरे शब्‍दों में कहें तो, प्रत्‍येक कैप्‍सूल ही अपने आप में एक स्‍वतंत्र स्‍क्रीन इकाई है, इस तकनीक की यही वि‍शेषता इसे लचकदार भी बनाती है.


ई-इंक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि‍ इसमें ऊर्जा बहुत कम प्रयुक्‍त होती है और यदि‍ स्‍क्रीन को रि‍फ़्रेश न करें तो उस पर उभरा अंति‍म चि‍त्र, ऊर्जा की खपत बि‍लकुल ही नहीं करता, और चि‍त्र अगली बार रि‍फ़्रेश कि‍ए जाने तक वैसे ही दि‍खता रहता है. यह मुख्‍यत: श्‍वेत-श्‍याम तकनीक थी लेकि‍न अब इसमें रंगीन स्‍क्रीन भी आने लगे हैं यद्यपि‍ ये अभी एल.सी.डी. /एल.ई.डी. जैसे चटख रंगीन नहीं हैं. इस तकनीक में अभी आगे काम चल रहा है. अभी इस तकनीक ने फ़ि‍ल्‍म चलाने लायक गति‍ प्राप्‍त नहीं की है किंतु अब यह कार्टून-एनीमेशन सक्षम है. आशा की जानी चाहि‍ए कि‍ जल्‍द ही इसमें रंगीन फ़ि‍ल्‍में भी सामान्‍य गति‍ पर देखी जा सकेंगी.

इस तकनीक के बहुत से लाभ हैं जैसे, शीशे पर नि‍र्भरता और बड़ी बैटरी की आवश्‍यकता समाप्‍त हो जाने से उपकरणों का वज़न बहुत कम हो जाएगा, इसके स्क्रीन से आंखें नहीं थकतीं, शीशे के टूटने का जो डर सदा बना रहता है वह इसके साथ नहीं है, ऊर्जा-खपत बहुत कम होना इसकी वि‍शेषता है जि‍सके कारण इसे क्रेडि‍ट कार्ड तक में प्रयोग कि‍या जा रहा है, बहुत कम ऊर्जा की खपत के कारण इस तकनीक को प्रयोग करने वाले उपकरण गर्म नहीं होते. लचीले  स्‍क्रीन के कारण इसके प्रयोग की संभावनाएं असीम हैं. आज र्इ-इंक तकनीक का प्रयोग करने वाली कंपनि‍यों में अमेज़न, बर्न्स एंड नोबल, कैसि‍यो, सि‍टि‍ज़न, हिताची, मोटरोला, प्लास्टिक लॉजिक, सैमसंग और सोनी इत्‍यादि‍ हैं.

और अधि‍क जानकारी के लि‍ए इंटरनेट पर नि‍म्‍न लिंक भी देखे जा सकते हैं.
Yota phone
https://www.youtube.com/watch?NR=1&feature=endscreen&v=naZ0VYGbWts
Plastic paper
https://www.youtube.com/watch?NR=1&v=FPYjP1m05dA&feature=fvwp
Sony Pad
https://www.youtube.com/watch?v=94Ifhuc2bbQ
Other products
https://www.youtube.com/watch?v=YtXRG7sS3ps
Future products
https://www.youtube.com/watch?v=RklWfdwYK9w
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-काजल कुमार

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