Sunday, May 23, 2010

फ़ज़ी टिप्पणियों का इलाज

अरविन्द मिश्रा जी का ब्लाग है क्वचिदन्यतोअपि..........! जिस पर उनकी पोस्ट आई है जिससे यह लगा कि शायद उनका ई मेल अकाउंट हैक हो गया है और कोई उनका अकांउट प्रयोग कर उनके नाम से टिप्पणियां कर रहा है.


18 मई 2010 को वेद कुरआन ब्लाग पर मेरे नाम से एक टिप्पणी किसी ने की थी. मुझे भी हैरानी हुई थी. पर फ़र्क़ ये था कि वहां न तो मेरा चित्र था न ही मेरा नाम उस तरह से लिखा था जैसा मैं लिखता हूं. टिप्पणी का लिंक मेरे ब्लाग की ही एक पोस्ट इंगित कर रहा था.


ऐसे में, इसका एक ही इलाज है जो ब्लागर- सेवा प्रदाता की ज़िम्मेदारी भी बनती है कि जैसे ई मेल आई.डी. केवल एक ही हो सकती है उसी तरह केवल एक ही नाम (चाहे ब्लाग का या, ब्लागर का) सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन के लिए स्वीकृत करे. अन्यथा जब तक यह बाधित नहीं किया जाएगा, यह तो होता ही रहेगा.


आमतौर से, ज़्यादा से ज़्यादा IP एड्रैस ढूंढा जा सकता है पर आम ब्लागर न तो इसे ब्लाक कर सकता है (जैसे कि ई मेल में स्पैम ब्लाकर होता है) और न ही मुफ़्त के कानूनी पचड़े में पड़ना पसंद करता है. और सबसे बड़ी बात, शिकायत में ब्लागर लिखेगा भी क्या कि उसे क्या नुक़्सान हुआ ... भारत में हत्यारों को तो सज़ा मिलती नहीं फ़र्ज़ी टिप्पणियों के लिए किसके पास इतना समय, पैसा और धैर्य है !
0-----0

Saturday, May 15, 2010

हम चीन का मुक़ाबला नहीं कर सकते


आज के 'टाइम्स आफ़ इन्डिया' (15 मई, 2010) में एक लेख छपा है "विचारों की शक्ति". यह लेख चीन के बारे में है. इसमें चीन की राजनैतिक व्यवस्था व पूंजी स्रोत से इतर, केवल विचारों की बात की गई है. जैसे:-


- अकेली यांगत्सी नदी पर ही 17 पुल बनाए जा रहे हैं. इनमें से कई पुलों के लिए 100 साल तक की मुरम्मत का ध्यान रखा जा रहा है.
- पुलों पर दरारों की निगरानी के लिए बिजली से चलने वाली ट्रामों की व्यवस्था है.
- कई पुल लंबाई, उंचाई और सस्पेंशन में विश्व कीर्तिमान बनाने वाले हैं.
- चीन की अभियांत्रिकी ने पश्चिम को पीछे छोड़ दिया है.
- चीन में अभी हवाई यातायात कम है किन्तु अगले 25 वर्ष का पूर्वानुमान लगा कर बीजिंग हवाई अड्डे को लंदन के हीथ्रो से कुल क्षेत्रफल में अधिक रखा गया है..
- कम समय में अधिक यात्रियों को लाने-ले जाने की दृष्टि से कई रेलों की गति 400 कि0मी0 प्रति घंटा से अधिक है.
- तिब्बत को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए समुद्रतल से 15000 फुट की उंचाई वाले पहाड़ी-क्षेत्र में 2000 कि0मी0 लंबी रेल-लाइन बिछा डाली है, जबकि हम आज भी अंग्रजों की बनाई शिमला-कालका रेल-लाइन का ही राग अलाप रहे हैं.
- भारत में केवल वर्तमान सुविधाओं के विस्तार के ही प्रयत्न किए जाते हैं जबकि चीन हर चीज़ को नए सिरे बना रहा है चाहे वह आवासीय परिसर हों, सड़कें हों, बिजली हो या फर चाहे पानी ही की बात क्यों न हो.


अतिरिक्त इसके, जर्मनी में बनी संसार की पहली चुंबकीय रेल “Levitation Train" जर्मनी में चलने से भी पहले चीन में चली थी. जितनी विदेशी पूंजी चीन जा रही है उसका मुश्किल से 10% भारत आ रहा है. चीन ने अपने पूंजीवादी पांव अफ़्रीका में कई साल पहले से ही फैलाने शुरू कर दिये हैं जबकि अपेक्षाकृत, भारत आज भी इन अफ़्रीकी देशों को मुंह-ज़ुबानी समर्थन से आगे नहीं कुछ नहीं दे रहा है. चीन को पता है कि अफ़्रीका विश्व का अंतिम पिछड़ा इलाक़ा है जहां आने वाले कई दशकों तक पूंजी निवेश की पर्याप्त संभावनाएं रहने वाली हैं, इसीलिए वह कहीं पहले से पैठ बनाने में लगा हुआ है. हम सो रहे हैं.


भारत को छुटभइयेपन से ही फ़ुर्सत नहीं है. दिल्ली में छटांक भर के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं के निर्माण को लेकर भी रोज़ बवाल हुआ रहता है. ले दे कर भारत के पास केवल एक ई0 श्रीधरन हैं जिन्होंने मगरमच्छनुमा नेताओं के बावजूद कोंकण और मैट्रो बनाईं. दूसरे, चतुर्भुज राजमार्ग व तीसरे, पश्चिमी-सीमा रेल मार्ग अन्य बचा खुचा कुछ है जिसकी हम डींगें हांक सकते हैं. यद्यपि नदियों को जोड़ने की योजना ठंडे बस्ते हैं वहीं दूसरी ओर बिजली व पानी की दिशा में हम घोंघा-चाल से चल रहे हैं. आवासीय क्षेत्र तो माफ़िया के भरोसे ही छोड़ रखा है हमने.


लेकिन फिर भी चिंतातुर हो गहन मनन करने की अपेक्षा, चीन को लेकर गाल बजाने से बाज नहीं आते हम.
0----------0
-काजल कुमार

Sunday, February 28, 2010

सभी फ़ार्मेट खोलने वाला मुफ़्त वर्ड-प्रोसेसर



यदि आप विंडोज़ आपरेटिंग सिस्टम प्रयोग कर रहे हैं तो ज़रूर कभी न कभी इस समस्या से दो-चार हुए होंगे जब आपको लगा होगा कि फलां फ़ाईल माइक्रोसाफ़्ट वर्ड में नहीं खुल रही. ऐसा आमतौर से उन फ़ाइलों के साथ होता है जो आपको या तो इ-मेल से मिलती हैं या किसी इंटरनेट साइट से डाउनलोड करते हैं.

यह इसलिए होता है कि जब ये फ़ाइलें किसी ऐसे साफ़्टवेयर को प्रयोग कर लिखी जाती हैं जिनके साथ विंडोज़ आपरेटिंग कंपैटीवल न हो. ये फ़ाइलें प्राय: उन साफ़्टवेयर को प्रयोग कर लिखी होती हैं जो लीनेक्स जैसे ओपन सोर्स प्लेटफ़ार्म पर चलते हैं. इन्हें पढ़ने के लिए आमतौर से स्टार आफ़िस जैसे ओपन सोर्स वर्ड प्रोसेसर की ज़रूरत होती है जो आमतौर से 250-300 एम.बी. तक के होते हैं.

माइक्रोसाफ़्ट इस बात का पूरा ध्यान रखता है कि उसके साफ़्टवेयर, लीनेक्स जैसे प्रतिद्वन्दी आपरेटिंग सिस्टम पर न चलें जबकि प्रतिद्वन्दी अपने साफ़्टवेयर विंडोज़ आपरेटिंग सिस्टम पर भी चलने के लिए बनाते रहते हैं. ऐबीवर्ड ऐसा ही एक ओपन सोर्स वर्ड प्रोसेसर है.

ऐबीवर्ड केवल 7-8 एम.बी. का है, मुफ़्त है, विंडोज़ आपरेटिंग सिस्टम के अलावा लीनेक्स जैसे कई दूसरे  प्लेटफ़ार्म पर भी चलता है और सबसे बड़ी बात, तमाम तरह के फ़ार्मेट की फ़ाइलें केवल खोल ही नहीं सकता बल्कि कई अन्य फ़ार्मेट में सहेज भी सकता है. बस देखने में देसी-सा सीधा-सादा लगता है पर विश्वास करें, आप इसकी शक़्ल पर न जाऐं यह बहुत बढ़िया है. आप इसे यहां से डाउनलोड कर सकते हैं.
0---------0 
-काजल कुमार





Sunday, January 17, 2010

वायरलेस मोडम प्रयोग करे हो ? तब तो ज़रूर पढ़ें…

यदि आप इंटरनेट कनेक्शन के लिए वायरलेस मोडम प्रयोग कर रहे हैं तो आपको यह विचार ज़रूर आता होगा कि और कौन लोग हैं जो आपके मोडम से जुड़े हैं. यह विचार आपको उस समय तो ज़रूर ही आता होगा जब आपको लगता हो कि इंटरनेट गति कुछ कम लग रही है. उस समय आप जानना चाहते हैं कि यदि कोई दूसरा भी आपके इंटरनेट मोडम का प्रयोग कर रहा हो तो उसे कुछ समय के लिए रूकने को कहा जाए.

 

घर पर या अपने ही कार्यालय में तो वायरलेस मोडम सुविधा की दृष्टि से प्रयोग किये ही जाते हैं. वायरलेस मोडम को सुरक्षित (secured connection) रूप से कनेक्ट करने का प्रावधान तो रहता है पर कई लोग इसका प्रयोग नहीं करते यह सोच कर कि उनके कनेक्शन की डाउनलोड सीमा असीमित है या, कौन हर कंप्यूटर के लिए पासवर्ड बताता घूमे. बात तो सही है पर याद रखना चाहिए कि बैंडविड्थ सीमित होने के कारण जितने अधिक कंप्यूटर इंटरनेट का प्रयोग एक ही समय करेंगे, उनकी गतिसीमा उतनी ही कम हो जाएगी.

 

एक ही वायरलेस मोडम का प्रयोग करते हुए इंटरनेट से जुड़े दूसरे कंप्यूटरों की जानकारी के लिए आप यह छोटा सा फ्रीवेयर http://zamzom.com/ से डाउनलोड कर इंस्टाल कर सकते हैं. Fast Scan बटन से यह आपके कंप्यूटर की जानकारी देता है जबकि, Deep Scan बटन दबाने पर मोडम प्रयोग कर रहे दूसरे कंप्यूटरों की जानकारी देता है.

 

image

0-काजल कुमार

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin